40 साल पुराना सिंधिया राजवंश का संपत्ति विवाद समाप्ति की ओर, हाईकोर्ट में आज समझौते पर लग सकती है अंतिम मुहर

ग्वालियर ( शिखर दर्शन ) // सिंधिया राजवंश की करीब चार दशक पुरानी पैतृक संपत्ति विवाद का आज निर्णायक पड़ाव आ सकता है। ग्वालियर हाईकोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होने वाली सुनवाई में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच हुए आपसी समझौते पर अंतिम मुहर लगने की संभावना है। यदि अदालत समझौते को मंजूरी देती है तो लगभग 40 वर्षों से चला आ रहा यह बहुचर्चित कानूनी विवाद समाप्त हो जाएगा।
यह विवाद वर्ष 1988-89 में राजपरिवार की पैतृक संपत्तियों के बंटवारे को लेकर शुरू हुआ था। वर्ष 2001 में माधवराव सिंधिया के निधन के बाद यह मामला ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआ उषा राजे, वसुंधरा राजे तथा यशोधरा राजे सिंधिया के बीच कानूनी लड़ाई में बदल गया। बाद में तीनों बहनों ने पैतृक संपत्ति में समान अधिकार का दावा किया, जबकि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अपना पक्ष न्यायालय में रखा। वर्ष 2017 से मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
समझौते के दायरे में सिंधिया राजवंश की अनेक ऐतिहासिक और बहुमूल्य संपत्तियां शामिल हैं। इनमें ग्वालियर का जयविलास पैलेस, ऊषा किरण पैलेस, रानी महल, छोटी विश्रांति, हिरण्यवन कोठी, शिवपुरी का माधव विलास पैलेस, इंदौर का हैप्पी विलास, उज्जैन का कालियादेह पैलेस, पुणे का प्रभात विलास पैलेस, दिल्ली का सिंधिया विला, ग्वालियर हाउस, मुंबई की समुद्र तटीय संपत्तियां तथा वाराणसी का सिंधिया घाट प्रमुख हैं। इसके अलावा पन्ना रत्न से निर्मित दुर्लभ शिवलिंग, विभिन्न ट्रस्टों की संपत्तियां, शेयर निवेश और अन्य चल-अचल संपत्तियां भी समझौते का हिस्सा हैं।
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को समझौते का अंतिम प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिए थे। आज सभी पक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी सहमति दर्ज कराएंगे, जिसके बाद अदालत अंतिम निर्णय दे सकती है।
हालांकि अभी यह सार्वजनिक नहीं किया गया है कि समझौते के तहत किस वारिस को कौन-सी संपत्ति मिलेगी। अदालत की स्वीकृति और औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संपत्तियों के अंतिम बंटवारे की पूरी तस्वीर सामने आएगी।



