अपोलो फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट मामला: 27 मरीजों की मौत की भी हुई जांच, आरोपी पर चार्जशीट, अस्पताल प्रबंधन को क्लोजर रिपोर्ट

बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // न्यायधानी के बहुचर्चित अपोलो अस्पताल फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट प्रकरण में बिलासपुर पुलिस ने करीब 17 वर्ष पुराने मामले की विस्तृत विवेचना पूरी कर न्यायालय में आरोपी चिकित्सक के विरुद्ध अभियोग पत्र प्रस्तुत कर दिया है। वहीं अस्पताल प्रबंधन एवं चयन समिति की भूमिका की अलग से जांच करने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उनके संबंध में क्लोजर रिपोर्ट न्यायालय में पेश की गई है।
फर्जी पहचान और दस्तावेजों के सहारे बना विशेषज्ञ डॉक्टर
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने बताया कि आरोपी डॉ. नरेन्द्र विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेन्द्र जॉन कैम ने कथित रूप से फर्जी पहचान और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर स्वयं को हृदय रोग विशेषज्ञ के रूप में प्रस्तुत कर अपोलो अस्पताल में सेवाएं दीं तथा अनेक मरीजों का उपचार किया। जांच में यह भी सामने आया कि उसने स्वयं को एमबीबीएस, एमआरसीपी एवं इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी का विशेषज्ञ बताया था, लेकिन मेडिकल काउंसिल से उसके विशेषज्ञ पंजीयन की पुष्टि नहीं हो सकी।
दमोह में दर्ज प्रकरण की जांच के दौरान यह भी पता चला कि आरोपी ने कथित रूप से “नरेन्द्र जॉन कैम” नाम से आधार कार्ड, पैन कार्ड सहित अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार कराए थे। वहीं उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज से भी उसके नाम पर वैध शैक्षणिक अभिलेख नहीं मिले।
पूछताछ में अपोलो अस्पताल में सेवाएं देने की बात स्वीकार
दमोह से प्रोडक्शन वारंट पर बिलासपुर लाकर पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि वह अपोलो अस्पताल में कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में कार्यरत था तथा उसने अनेक मरीजों की एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की थी। हालांकि वह अपनी विशेषज्ञता संबंधी आवश्यक दस्तावेज पुलिस के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर सका।
27 मरीजों की मौत की भी हुई जांच
पुलिस जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि आरोपी के कार्यकाल में उपचार प्राप्त करने वाले लगभग 27 मरीजों की मृत्यु हुई थी, जिनमें प्रदेश के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद शुक्ल भी शामिल थे। हालांकि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि इन मामलों में प्रमाणित अभिलेख और पर्याप्त शिकायतें उपलब्ध नहीं हो सकीं। केवल दो लोगों ने विधिवत शिकायत दर्ज कराई। ऐसे में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इन सभी मौतों को कानूनी रूप से आरोपी की कथित फर्जी विशेषज्ञता से जोड़ना संभव नहीं था।
27 जून 2025 को न्यायालय में पेश की गई चार्जशीट
पुलिस ने फर्जी दस्तावेज, कूटरचना, धोखाधड़ी और अवैध रूप से विशेषज्ञ चिकित्सक बनकर चिकित्सा कार्य करने के पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोपी डॉ. नरेन्द्र विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेन्द्र जॉन कैम के विरुद्ध 27 जून 2025 को न्यायालय में चार्जशीट प्रस्तुत कर दी।
अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की भी हुई अलग जांच
एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि आरोपी के विरुद्ध चालान पेश करने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन और चयन समिति की भूमिका की अलग से जांच जारी रखी गई। इस दौरान अपोलो अस्पताल से दोबारा पत्राचार किया गया, नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण किया गया तथा वर्ष 2006 के अभिलेख उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।
अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को बताया कि नियुक्ति लगभग 17-18 वर्ष पहले हुई थी। उस समय अभिलेख केवल हार्ड कॉपी में रखे जाते थे और रिकॉर्ड संरक्षण की निर्धारित अवधि पूरी होने के कारण पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।
साक्ष्य नहीं मिलने पर क्लोजर रिपोर्ट पेश
पुलिस के अनुसार वरिष्ठ अधिकारियों एवं जिला अभियोजन अधिकारी की विधिक राय लेने के बाद उपलब्ध दस्तावेजों, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। जांच में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि अस्पताल प्रबंधन या चयन समिति ने जानबूझकर अथवा आपराधिक षड्यंत्र के तहत आरोपी की नियुक्ति की थी। इसी आधार पर संबंधित पक्षों के संबंध में न्यायालय के समक्ष क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर अब भी कायम हैं बड़े सवाल
हालांकि पुलिस जांच में आरोपी के विरुद्ध फर्जी पहचान, संदिग्ध दस्तावेज और धोखाधड़ी के पर्याप्त साक्ष्य सामने आए हैं, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने निजी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, दस्तावेजों के सत्यापन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि विवेचना पूरी तरह उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की गई है तथा जहां पर्याप्त प्रमाण मिले वहां अभियोजन किया गया और जहां साक्ष्य नहीं मिले, वहां कानून के अनुरूप न्यायालय में क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।



