“अपराधियों को सजा दिलाना चाहते हैं या बचाना?” पुलिस जांच पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, डीजीपी को दिए निर्देश

ग्वालियर ( शिखर दर्शन ) // मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच प्रक्रिया में बरती जा रही खामियों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए तीखी टिप्पणी की है। न्यायालय ने सवाल किया कि “पुलिस अपराधियों को सजा दिलाना चाहती है या उन्हें बचाना?” कोर्ट ने कहा कि यदि गिरफ्तारी का आधार आरोपी को लिखित रूप में नहीं बताया जाता है तो इसका लाभ अपराधियों को मिल सकता है और वे सजा से बच सकते हैं। हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को सभी पुलिस अधिकारियों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने तथा 18 अगस्त तक पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
दतिया के गांजा बरामदगी मामले में हुई सुनवाई
मामला दतिया जिले के बसई थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने एक आरोपी के कब्जे से 86.850 किलोग्राम गांजा बरामद करने का दावा किया था। आरोपी के भाई धर्मेंद्र लोधी ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर आरोप लगाया कि गिरफ्तारी का आधार लिखित रूप में नहीं बताया गया, इसलिए गिरफ्तारी अवैध है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपी को एनडीपीएस अधिनियम की धारा 50 के तहत विधिवत लिखित सूचना दी गई थी। पुलिस की कार्रवाई का दस्तावेजी रिकॉर्ड उपलब्ध था तथा आरोपी के परिजनों को भी गिरफ्तारी की सूचना दी गई थी। इन तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी।
लिखित जानकारी नहीं देने पर अपराधियों को मिल सकता है लाभ
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह भी कहा कि कई मामलों में पुलिस गिरफ्तारी का आधार अलग से लिखित रूप में आरोपी को नहीं बताती, जो गंभीर कानूनी त्रुटि है। अदालत ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी का कारण लिखित रूप में बताना संवैधानिक और कानूनी दायित्व है। यदि इसका पालन नहीं किया गया तो जांच और अभियोजन कमजोर पड़ सकते हैं तथा आरोपी इसका लाभ उठाकर सजा से बच सकते हैं।
हाईकोर्ट के निर्देश
हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि सभी पुलिस अधिकारियों के लिए आरोपी को गिरफ्तारी का आधार लिखित रूप में उपलब्ध कराना अनिवार्य किया जाए। गिरफ्तारी के दौरान संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रिया का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए, सभी पुलिस इकाइयों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं तथा जांच अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
उल्लेखनीय है कि पुलिस मुख्यालय इस संबंध में 13 फरवरी 2026 को सभी पुलिस इकाइयों को परिपत्र जारी कर चुका है। अब 18 अगस्त को पेश होने वाली पालन रिपोर्ट पर नजर रहेगी कि न्यायालय के निर्देशों का प्रदेशभर में कितना प्रभावी पालन हो रहा है।



