बिलासपुर संभाग

स्कूलों में मंत्रोच्चार मामला: हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की, कहा- किसी छात्र को नहीं किया जा सकता बाध्य

सरकार के आश्वासन पर कोर्ट ने दी राहत; दबाव डालने के साक्ष्य मिलने पर दोबारा याचिका दायर करने की छूट

बिलासपुर (शिखर दर्शन)// प्रदेश के सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार कराए जाने संबंधी राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शासन की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी, लेकिन स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र को मंत्रोच्चार के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यदि भविष्य में किसी विद्यालय में छात्रों पर मंत्रोच्चार का दबाव डाले जाने के प्रमाण मिलते हैं, तो याचिकाकर्ता साक्ष्यों के साथ पुनः न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

राज्य सरकार द्वारा स्कूलों में मंत्रोच्चार शुरू कराने के लिए जारी पत्र को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल सलीम रिजवी एवं अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि यह आदेश संविधान की भावना के विपरीत है तथा इससे धार्मिक भेदभाव की स्थिति उत्पन्न होती है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि विद्यालयों में केवल हिंदू धर्म के मंत्रों का पाठ कराया जा रहा है, जबकि अन्य धर्मों की शिक्षाओं की अनदेखी की गई है। उन्होंने राज्य सरकार के आदेश को निरस्त करने की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान सरकार ने दिया आश्वासन

जस्टिस ए.के. प्रसाद की अदालत में गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से बताया गया कि फिलहाल किसी भी स्कूल में मंत्रोच्चार नहीं कराया जा रहा है। शासन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में मंत्रोच्चार शुरू किया जाता है, तो यह पूरी तरह स्वैच्छिक होगा। जो छात्र इसमें शामिल होना चाहें, वे भाग लेंगे और जो नहीं चाहें, उन्हें किसी प्रकार के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।

कोर्ट ने दी भविष्य के लिए कानूनी राहत

शासन के इस आश्वासन पर अदालत ने कहा कि किसी भी छात्र पर मंत्रोच्चार के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में किसी विद्यालय में छात्रों को मंत्रोच्चार के लिए बाध्य किए जाने के प्रमाण सामने आते हैं, तो याचिकाकर्ता साक्ष्यों के साथ नई याचिका प्रस्तुत करने के लिए स्वतंत्र होंगे। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने वर्तमान याचिका को खारिज कर दिया।

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