राम मंदिर चढ़ावा गबन : सबूत मिटाने और रकम ठिकाने लगाने की कोशिश, पुलिस जांच में बड़ा खुलासा

मोबाइल डेटा डिलीट करने से लेकर संदिग्ध संपत्तियों तक की जांच तेज, कई आरोपी पुलिस और एसआईटी के रडार पर
अयोध्या ( शिखर दर्शन ) // राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की जांच में लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस और विशेष जांच दल (एसआईटी) की पड़ताल में आरोपियों द्वारा सबूत मिटाने और कथित गबन की रकम को ठिकाने लगाने की कोशिश किए जाने के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, कार्रवाई की आशंका के बीच कई आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन से महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य हटाने का प्रयास किया।
जांच में सामने आया है कि कुछ आरोपियों ने मोबाइल फोन से व्हाट्सएप चैट और अन्य महत्वपूर्ण डेटा डिलीट कर दिया, जबकि कुछ मोबाइल फोन पूरी तरह फॉर्मेट किए गए हैं। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहराई से जांच कर रही है।
पुलिस जांच में आरोपियों की आर्थिक स्थिति में अचानक हुई बढ़ोतरी भी जांच का प्रमुख विषय बनी हुई है। एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि कुछ संदिग्धों की संपत्ति कथित रूप से 50 से 100 गुना तक कैसे बढ़ी। जमीन, प्लॉट, होटल और अन्य अचल संपत्तियों की खरीद-फरोख्त की भी जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियों के रडार पर टिन्नू यादव सहित उससे जुड़े 30 से अधिक लोगों के नाम बताए जा रहे हैं। सभी के बैंक लेनदेन, संपत्तियों और वित्तीय गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है।
मामले के सामने आने के बाद राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए हैं। जांच के दायरे में कंट्रोल रूम प्रभारी, सुरक्षा कर्मियों, पीएसी और ड्यूटी पर तैनात संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका भी शामिल की गई है। एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर विभागीय कार्रवाई किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
वहीं, ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच जारी है। सूत्रों के अनुसार, अब तक किसी भी बड़े पदाधिकारी को क्लीन चिट नहीं दी गई है और सभी पहलुओं की विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



