भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में निलंबित थानाध्यक्ष के बयान से बढ़ा विवाद

“किस्मत में मरना लिखा था” टिप्पणी पर उठे सवाल, जांच रिपोर्ट का इंतजार
आरा ( शिखर दर्शन ) // भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मामले में निलंबित किए गए तत्कालीन थाना प्रभारी राजेश मालाकार के एक बयान के बाद विवाद और गहरा गया है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि “भरत तिवारी की किस्मत में मरना लिखा था, इसलिए उसकी मौत हो गई।” इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
राजेश मालाकार ने अपने पक्ष में कहा कि पुलिस टीम भरत तिवारी को गिरफ्तार करने के लिए गई थी। उनके अनुसार कार्रवाई के दौरान भरत तिवारी ने पुलिस दल पर फायरिंग की थी, जिसके जवाब में आत्मरक्षा के तहत पुलिस ने गोली चलाई। पुलिस का दावा है कि जवाबी कार्रवाई में लगी गोली से भरत तिवारी की मौत हुई।
हालांकि घटना के बाद सामने आए कुछ वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के दावों ने पुलिस कार्रवाई पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग उठ रही है। हालांकि वीडियो की सत्यता और पूरे घटनाक्रम की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच जारी है। प्रशासन की ओर से अब तक अंतिम जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में एनकाउंटर की वास्तविक परिस्थितियों और तथ्यों को लेकर स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि घटना पुलिस की आत्मरक्षात्मक कार्रवाई थी या मामले में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है। फिलहाल पूरे मामले पर लोगों की निगाहें जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।



