घंटी बजते ही जंगल से पहुंच जाते हैं भालू ! 12 वर्षों से आरती में शामिल हो रहे ‘जामवंत’, रहस्य बना आकर्षण का केंद्र

छत्तीसगढ़ के रामवन क्षेत्र का अनोखा नजारा; आरती की ध्वनि सुन प्रसाद ग्रहण करने आते हैं दर्जनों भालू, पुजारी बोले— “भालुओं से नहीं, इंसानों से लगता है डर”
अनूपपुर/एमसीबी ( शिखर दर्शन ) // प्रकृति और आस्था के अद्भुत संगम का एक अनोखा दृश्य इन दिनों लोगों को हैरान कर रहा है। मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले से लगे छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत उचेहरा के राजामाड़ा (रामवन) क्षेत्र में प्रतिदिन ऐसा नजारा देखने को मिलता है, जिसे देखकर लोग इसे चमत्कार, तो कुछ लोग प्रकृति और जीव-जंतुओं के व्यवहार का अनूठा उदाहरण मान रहे हैं। यहां सुबह और शाम आरती शुरू होते ही जंगल से जंगली भालू निकलकर मंदिर परिसर पहुंचते हैं और प्रसाद ग्रहण करने के बाद शांतिपूर्वक वापस लौट जाते हैं।
आरती की घंटी बनती है भालुओं के लिए बुलावा
स्थानीय लोगों के अनुसार जैसे ही मंदिर में आरती शुरू होती है और घंटियों की आवाज गूंजती है, वैसे ही आसपास के जंगलों से भालू निकलकर कुटी परिसर में पहुंच जाते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कई बार एक साथ एक दर्जन से अधिक भालू परिसर में दिखाई देते हैं। आश्चर्यजनक बात यह है कि वे किसी प्रकार का उपद्रव नहीं करते और प्रसाद ग्रहण कर शांतिपूर्वक लौट जाते हैं।
12 वर्षों से जारी है यह अनोखी परंपरा
कुटी में निवासरत सीताराम बाबा बताते हैं कि वर्ष 2013 से यह सिलसिला लगातार जारी है। उनके अनुसार जब वे माहोरा पहाड़ क्षेत्र से आकर राजामाड़ा (रामवन) में रहने लगे, तब कुछ समय बाद भालुओं का यहां आना शुरू हुआ। धीरे-धीरे यह क्रम नियमित हो गया और अब यह प्रतिदिन की दिनचर्या जैसा बन चुका है।
बाबा का कहना है कि सुबह और शाम आरती के समय भालुओं का पहुंचना वर्षों से जारी है और आज तक किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना सामने नहीं आई है।
चमत्कार या वर्षों से विकसित हुई आदत ?
इस अनोखी घटना को लेकर लोगों की अलग-अलग राय है। स्थानीय ग्रामीण इसे बाबा की तपस्या, आस्था और दिव्य कृपा से जोड़कर देखते हैं, जबकि वन्यजीवों के व्यवहार को समझने वाले कुछ लोग इसे लंबे समय में विकसित हुई एक स्वाभाविक आदत मानते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी वन्य जीव को लंबे समय तक एक निश्चित स्थान पर भोजन मिलता रहे तो वह उस स्थान और समय को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लेता है। हालांकि धार्मिक स्थल पर जंगली भालुओं का इस तरह नियमित रूप से पहुंचना निश्चित रूप से असाधारण घटना है।
“ये भालू नहीं, जामवंत हैं”
सीताराम बाबा का दृष्टिकोण इस पूरे घटनाक्रम को और रोचक बना देता है। बाबा कहते हैं कि ये साधारण भालू नहीं, बल्कि भगवान राम के परम भक्त जामवंत के स्वरूप हैं।
उन्होंने कहा कि यदि आप इन्हें प्रेम देंगे तो ये भी प्रेम ही लौटाएंगे। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें भालुओं से डर नहीं लगता, तो उनका जवाब सुनकर लोग चौंक जाते हैं।
“मुझे भालुओं से नहीं, इंसानों से डर लगता है।”
दूर-दूर से पहुंच रहे लोग
राजामाड़ा (रामवन) का यह अद्भुत दृश्य अब लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। आसपास के जिलों के अलावा दूसरे राज्यों से भी लोग यहां पहुंचकर आरती के दौरान भालुओं के आने का नजारा देखने लगे हैं। कई श्रद्धालु इसे भगवान की लीला और प्रकृति के साथ मनुष्य के सौहार्दपूर्ण संबंध का जीवंत उदाहरण मानते हैं।
एक नजर में
● छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले के राजामाड़ा (रामवन) क्षेत्र का मामला।
● वर्ष 2013 से प्रतिदिन आरती के समय पहुंच रहे हैं भालू।
● घंटियों की आवाज सुनकर मंदिर परिसर में आते हैं।
● प्रसाद ग्रहण कर बिना किसी उपद्रव के लौट जाते हैं।
● स्थानीय लोग इसे चमत्कार और आस्था से जोड़ते हैं।
● पुजारी का दावा— “ये भालू नहीं, जामवंत हैं।”
● अनोखा दृश्य देखने दूर-दूर से पहुंच रहे श्रद्धालु।


