डीजल और एटीएफ निर्यात पर बढ़ी ड्यूटी: मोदी सरकार का बड़ा फैसला, घरेलू आपूर्ति बनाए रखने पर जोर

डीजल पर 14 रुपये और एटीएफ पर 12.50 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया गया विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क, आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा सीधा असर
नई दिल्ली ( शिखर दर्शन ) // केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) में बढ़ोतरी का फैसला लिया है। नई दरें 16 जून से प्रभावी हो गई हैं। सरकार ने डीजल के निर्यात पर 14 रुपये प्रति लीटर तथा एटीएफ के निर्यात पर 12.50 रुपये प्रति लीटर की दर से शुल्क बढ़ाया है। वहीं पेट्रोल के निर्यात शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह पूर्ववत 1.50 रुपये प्रति लीटर बना रहेगा।
घरेलू बाजार में उपलब्धता बनाए रखना उद्देश्य
सरकार का कहना है कि यह निर्णय देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों के कारण रिफाइनरी कंपनियों के लिए निर्यात अधिक लाभकारी हो रहा था। ऐसे में घरेलू आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए निर्यात शुल्क बढ़ाया गया है।
पश्चिम एशिया संकट का असर
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की मांग तथा कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई है। इससे भारतीय रिफाइनरियों के लिए निर्यात से अधिक मुनाफा मिलने की संभावना बढ़ गई थी। सरकार ने इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है।
आम उपभोक्ताओं को नहीं होगा असर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव केवल निर्यात पर लागू होगा। घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। इसलिए पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले ईंधन की कीमतों पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।
हर 15 दिन में होती है समीक्षा
पेट्रोलियम उत्पादों पर लगाए जाने वाले इस विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क की समीक्षा प्रत्येक 15 दिन में की जाती है। नई दरें पिछले पखवाड़े के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के औसत मूल्य के आधार पर तय की गई हैं। इससे पहले 1 जून 2026 को शुल्क दरों में संशोधन किया गया था।
ईंधन की कमी की आशंका से किया इनकार
पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ कार्य कर रही हैं और कच्चे तेल की आपूर्ति भी सामान्य बनी हुई है। मंत्रालय के अनुसार यह कदम केवल घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने और निर्यात को संतुलित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।



