स्कूलों में फिर सुनाई देंगे वैदिक मंत्र, संत समाज ने कहा- नई पीढ़ी को मिलेगा संस्कारों का आधार

भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को स्कूली शिक्षा से जोड़ने की पहल का संत समाज ने किया स्वागत
रायपुर ( शिखर दर्शन ) // मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से सोमवार को राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में विभिन्न संत-महात्माओं ने सौजन्य भेंट कर प्रदेश के विद्यालयों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों एवं नैतिक शिक्षा से जुड़े पारंपरिक श्लोकों और मंत्रों को पुनः शामिल किए जाने के निर्णय का स्वागत किया। संत समाज ने इस पहल को नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
मुख्यमंत्री से भेंट करने वालों में दक्षिण कौशल पीठाधीश्वर स्वामी राजीव लोचन दास जी महाराज, निर्वाणी अखाड़ा के महंत सुरेंद्र दास जी महाराज, शदाणी दरबार के उदय लाल जी तथा कबीर आश्रम सोनपैरी के देवकर साहब जी शामिल थे।
संत-महात्माओं ने कहा कि पूर्व में विद्यालयों में विद्यार्थियों को “गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर” जैसे मंत्रों एवं भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराया जाता था, जिससे बच्चों में अनुशासन, संस्कार और नैतिक मूल्यों का विकास होता था। समय के साथ ये परंपराएं शैक्षणिक वातावरण से दूर होती गईं, लेकिन राज्य सरकार की नई पहल से इन्हें पुनः स्थापित करने का अवसर मिला है।
संत समाज ने कहा कि शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र तथा अन्य प्रेरणादायी वैदिक और सांस्कृतिक प्रार्थनाओं का समावेश विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक होगा। इससे बच्चों में भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान और नैतिक चेतना का विकास होगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, संस्कार और जीवन मूल्यों के विकास का आधार भी है। राज्य सरकार आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों को जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र और अन्य प्रेरणादायी प्रार्थनाओं के समावेश से विद्यार्थियों में अनुशासन, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना का विकास होगा। यह पहल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए उन्हें जागरूक, संस्कारित और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
संत-महात्माओं ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को इस पहल के लिए साधुवाद देते हुए आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक विरासत को मजबूत करने वाला कदम है, जिसका लाभ आने वाली पीढ़ियों को मिलेगा।



