रजक कन्नोजे सेवा समिति के कथित अवैध चुनाव पर बढ़ा विवाद, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने खोला मोर्चा

रायपुर ( शिखर दर्शन ) // छत्तीसगढ़ रजक कन्नोजे सेवा समिति, संभाग बिलासपुर में आयोजित कथित चुनाव और सामाजिक सम्मेलन को लेकर विवाद गहरा गया है। छत्तीसगढ़ सर्व धोबी समाज के प्रदेश अध्यक्ष शंकर सिंह निर्मलकर सहित समाज के कई पदाधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चुनाव प्रक्रिया को अवैध, असंवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताते हुए इसका विरोध किया है। साथ ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से कार्यक्रम में शामिल नहीं होने की अपील की गई है।
महिलाओं को मतदान अधिकार से वंचित करने का आरोप
विरोध कर रहे समाजजनों का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में महिलाओं को मतदान और भागीदारी का अधिकार नहीं दिया गया। उनका कहना है कि यह महिलाओं के सम्मान और समान अधिकारों का उल्लंघन है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे नारी शक्ति का अपमान बताते हुए कहा कि जब देश में महिलाओं को राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी में बढ़ावा दिया जा रहा है, तब समाज के भीतर उन्हें चुनाव प्रक्रिया से बाहर रखना दुर्भाग्यपूर्ण है।
31 वर्षों से आय-व्यय विवरण प्रस्तुत नहीं करने का दावा
प्रदेश अध्यक्ष शंकर सिंह निर्मलकर ने आरोप लगाया कि समिति द्वारा पिछले 31 वर्षों से आय-व्यय का लेखा-जोखा पंजीयक कार्यालय में जमा नहीं किया गया है। इस संबंध में रजिस्ट्रार कार्यालय और मंत्रालय में शिकायत भी की गई है। उनका कहना है कि किसी भी पंजीकृत संस्था के लिए वार्षिक आय-व्यय विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
वित्तीय पारदर्शिता और वैध प्रक्रिया पर उठे सवाल
विरोध करने वाले सदस्यों का कहना है कि चुनाव से पहले पिछले कार्यकाल का वित्तीय ऑडिट और आय-व्यय का पूरा ब्यौरा आमसभा के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया। आरोप है कि बिना वित्तीय पारदर्शिता और वैध मतदाता सूची प्रकाशित किए जल्दबाजी में चुनाव कराने की प्रक्रिया अपनाई गई, जो संस्था के नियमों और संविधान के विपरीत है।
समाज के सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व नहीं मिलने का आरोप
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में समाज के सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से पूरी प्रक्रिया संचालित की गई। विरोध कर रहे लोगों ने इस चुनाव को समाज के संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ बताया है।
मुख्यमंत्री से कार्यक्रम में शामिल नहीं होने की अपील
समाज के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वरिष्ठ भाजपा नेता धरमलाल कौशिक से अपील की है कि वे इस कार्यक्रम में शामिल न हों। उनका कहना है कि जिस चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और जिसमें महिलाओं को मतदान का अधिकार नहीं दिया गया, ऐसे आयोजन में शामिल होना उचित नहीं होगा।
जांच और कार्रवाई की मांग
विरोध कर रहे समाजजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि चुनाव प्रक्रिया को निरस्त नहीं किया गया तो वे रजिस्ट्रार फर्म्स एवं सोसाइटीज तथा न्यायालय की शरण लेंगे। साथ ही समाज की संपत्ति, सम्मान और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए इस कथित चुनाव और शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार किए जाने की भी घोषणा की गई



