साय कैबिनेट के बड़े फैसले: पावर कंपनी के IPO को मंजूरी, किसानों को मिलेगा ₹15 हजार प्रति एकड़, 240 ई-बसों को हरी झंडी

कैबिनेट बैठक में किसानों, परिवहन, ऊर्जा और खनिज क्षेत्र से जुड़े कई अहम निर्णय; नवा रायपुर में स्टाम्प ड्यूटी छूट भी 2028 तक बढ़ी
रायपुर ( शिखर दर्शन ) // मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को नवा रायपुर स्थित महानदी भवन मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में किसानों, ऊर्जा, परिवहन, खनिज और सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगी। कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के आईपीओ को सैद्धांतिक मंजूरी देने के साथ खरीफ-2026 से कृषक उन्नति योजना को नए स्वरूप में लागू करने का निर्णय लिया। इसके अलावा 240 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन, योग विषय के प्रशासनिक पुनर्गठन और खनिज परिवहन व्यवस्था में तकनीक आधारित सुधारों को भी मंजूरी दी गई।
पावर ट्रांसमिशन कंपनी का आएगा IPO
मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड को आईपीओ के माध्यम से शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की सैद्धांतिक सहमति प्रदान की है। सरकार का मानना है कि इससे आम नागरिकों और निवेशकों को कंपनी की विकास यात्रा में भागीदार बनने का अवसर मिलेगा। साथ ही कंपनी की वित्तीय क्षमता, पारदर्शिता और संसाधन जुटाने की क्षमता को भी मजबूती मिलेगी। इस संबंध में आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने के लिए कंपनी के संचालक मंडल को अधिकृत किया गया है।
धान छोड़ अन्य फसल लेने वाले किसानों को मिलेगा 15 हजार रुपये प्रति एकड़
मंत्रिपरिषद ने खरीफ-2026 से कृषक उन्नति योजना के नए स्वरूप को मंजूरी दी है। योजना का उद्देश्य फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना, किसानों की आय बढ़ाना और धान पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना है। नई व्यवस्था के तहत धान के स्थान पर अन्य खरीफ फसलें लेने वाले किसानों तथा दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आदान सहायता दी जाएगी। योजना का लाभ एकीकृत किसान पोर्टल, एग्रीस्टेक पंजीयन और डिजिटल क्रॉप सर्वे के आधार पर मिलेगा।
राशन हितग्राहियों को मिलता रहेगा चना
कैबिनेट ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में पात्र हितग्राहियों को चना वितरण की निरंतरता बनाए रखने का निर्णय लिया है। इसके लिए राज्य नागरिक आपूर्ति निगम को ई-ऑक्शन प्लेटफॉर्म के माध्यम से चना खरीदने की अनुमति दी गई है। वर्तमान व्यवस्था को अप्रैल से जून 2026 तक तीन माह के लिए बढ़ाने का भी अनुमोदन किया गया है, जिससे हितग्राहियों को चना वितरण निर्बाध रूप से जारी रहेगा।
योग अब चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन
मंत्रिपरिषद ने योग विषय को समाज कल्याण विभाग से हटाकर चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। सरकार का मानना है कि योग आयुष प्रणाली का अभिन्न हिस्सा है और इससे संबंधित शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण गतिविधियों का बेहतर संचालन चिकित्सा शिक्षा विभाग के माध्यम से किया जा सकेगा।
रायपुर समेत चार शहरों में चलेंगी 240 इलेक्ट्रिक बसें
प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कैबिनेट ने पेमेंट सिक्योरिटी मैकेनिज्म (PSM) स्कीम के तहत डायरेक्ट डेबिट मैंडेट (DDM) की सहमति केंद्र सरकार को भेजने की अनुमति दी है। इस फैसले के बाद रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर और कोरबा में स्वीकृत कुल 240 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इससे नागरिकों को आधुनिक, सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल और किफायती सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिल सकेगी।
नवा रायपुर में स्टाम्प ड्यूटी छूट 2028 तक
कैबिनेट ने नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण को आपसी सहमति से भूमि क्रय पर दी जा रही स्टाम्प ड्यूटी छूट की अवधि 31 मार्च 2028 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। सरकार के अनुसार इससे भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी आएगी और नवा रायपुर के आधारभूत ढांचे एवं नियोजित विकास को गति मिलेगी।
खनिज परिवहन में RFID और ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य
मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ खनिज (खनन, परिवहन तथा भंडारण) नियम, 2009 में संशोधन को भी मंजूरी दी है। नए प्रावधानों के तहत खनिज परिवहन करने वाले वाहनों में RFID टैग और वाहन ट्रैकिंग प्रणाली अनिवार्य होगी। साथ ही खनिजों के ग्रेड निर्धारण और मात्रा आकलन के लिए आधुनिक तकनीक आधारित व्यवस्था लागू की जाएगी।
भंडारण अनुज्ञापत्रधारियों से वसूले जाने वाले भंडारण शुल्क और सिक्योरिटी डिपॉजिट में वृद्धि की गई है। इसके अलावा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए लाइसेंसधारकों को अतिरिक्त भूमि स्वीकृति तथा दो भंडारण लाइसेंसों के एकीकरण का प्रावधान भी लागू किया गया है। सरकार का दावा है कि इन बदलावों से अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा, पारदर्शिता बढ़ेगी और राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी।



