मध्यप्रदेश का ‘जल मॉडल’ बना दुनिया के लिए मिसाल: विदेशी राजनयिकों ने की सराहना

जल गंगा संवर्धन अभियान को मिली वैश्विक पहचान, सीएम मोहन यादव बोले- प्रदेश के लिए गौरव का क्षण
भोपाल ( शिखर दर्शन ) // मध्यप्रदेश में जल संरक्षण को लेकर चलाया जा रहा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रहा है। भारत भवन में आयोजित सदानीरा समागम में विभिन्न देशों से आए राजनयिकों ने अभियान के तहत किए जा रहे कार्यों और जनभागीदारी आधारित मॉडल की खुलकर सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे प्रदेश के लिए गौरव और सम्मान का विषय बताया।
जन-आंदोलन बन चुका है अभियान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान अब केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। प्रदेश जल आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और जल संरक्षण के क्षेत्र में नया इतिहास रच रहा है।
उन्होंने बताया कि अभियान के तहत अब तक 2 लाख 12 हजार से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण एवं पुनर्जीवन कार्य पूरा किया जा चुका है। राज्य सरकार का लक्ष्य इस संख्या को बढ़ाकर 3 लाख 66 हजार तक पहुंचाना है।
छह देशों के राजनयिक हुए शामिल
सदानीरा समागम में साइप्रस, फिजी, मेक्सिको, नेपाल, त्रिनिदाद एवं टोबैगो तथा इक्वाडोर सहित छह देशों के राजनयिकों ने भाग लिया। सभी प्रतिनिधियों ने जल संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए मध्यप्रदेश में किए जा रहे प्रयासों को अनुकरणीय बताया।
साइप्रस के उच्चायुक्त इवागोरस वराईओनाइडेस ने बताया कि उनका सांस्कृतिक दल 20 और 21 जून को भोपाल में प्रस्तुति देगा। वहीं इक्वाडोर के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन जॉर्ज विनिशियो अनरंगो ने कहा कि वे अपने देश में भी जल संरक्षण को समर्पित इसी प्रकार का आयोजन करने की दिशा में कार्य करेंगे।
नदियों और तालाबों के पुनर्जीवन पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों, तालाबों और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन की यह भागीरथी पहल अब प्रदेश की सीमाओं से निकलकर विश्व समुदाय के लिए प्रेरणा बन रही है। जल प्रबंधन का ‘मध्यप्रदेश मॉडल’ आज वैश्विक आवश्यकता के रूप में उभर रहा है।
कई देशों ने दिखाई रुचि
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कई देशों ने मध्यप्रदेश के जल संरक्षण मॉडल को अपने यहां लागू करने में रुचि दिखाई है। यह इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश के प्रयास अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान बना रहे हैं और जल संरक्षण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश अग्रणी भूमिका निभा रहा है।



