राष्ट्रीय

भूटान में 5.7 तीव्रता का भूकंप: असम, मेघालय और पूर्वोत्तर भारत में महसूस हुए झटके

देर रात कांपी धरती, भूटान से लेकर सिक्किम और असम तक दहशत का माहौल

गुवाहाटी ( शिखर दर्शन ) // भूटान के पुनाखा क्षेत्र के पास रविवार देर रात आए 5.7 तीव्रता के भूकंप से पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में धरती कांप उठी। रात करीब 11:06 बजे आए इस भूकंप के झटके असम, मेघालय, सिक्किम सहित पूर्वोत्तर के अन्य हिस्सों में महसूस किए गए। भूकंप के बाद लोगों में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल बन गया और कई लोग घरों से बाहर निकल आए।

भूटान के पुनाखा क्षेत्र में था केंद्र

प्राप्त जानकारी के अनुसार भूकंप का केंद्र भूटान के पुनाखा क्षेत्र के पास मात्र 10 किलोमीटर की उथली गहराई में स्थित था। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.7 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र गुवाहाटी से लगभग 250 किलोमीटर दूर बताया गया है।

पूर्वोत्तर के कई राज्यों में महसूस हुए झटके

भूकंप का असर भूटान तक सीमित नहीं रहा। इसके झटके असम, मेघालय, सिक्किम और पूर्वोत्तर भारत के अन्य हिस्सों में भी महसूस किए गए। कई स्थानों पर लोगों ने कुछ सेकंड तक धरती में कंपन महसूस होने की जानकारी दी। गंगटोक और आसपास के क्षेत्रों से भी झटके महसूस होने की खबरें सामने आई हैं।

नेपाल, बंगाल और बांग्लादेश तक पहुंचा असर

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भूकंप के झटके नेपाल, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में भी महसूस किए गए। हालांकि किसी भी क्षेत्र से जानमाल के नुकसान की तत्काल कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है।

हिमालयी क्षेत्र की सक्रियता ने बढ़ाई चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालय विश्व के सबसे सक्रिय भूगर्भीय क्षेत्रों में से एक है। पूर्वी हिमालय में बार-बार आने वाले भूकंप इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को दर्शाते हैं। रविवार रात का भूकंप भी इसी भूगर्भीय सक्रियता का संकेत माना जा रहा है।

प्रशासन सतर्क, स्थिति पर नजर

भूकंप के बाद संबंधित राज्यों के प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभागों ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। फिलहाल किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और अफवाहों से बचने की अपील की है।

जनवरी में भी आया था तेज भूकंप

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 5 जनवरी 2026 को असम में 5.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। ताजा झटकों ने एक बार फिर पूरे हिमालयी क्षेत्र और दक्षिण एशिया को भूगर्भीय गतिविधियों के प्रति सतर्क कर दिया है।

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