मध्यप्रदेश

जनगणना में खुला पलायन का बड़ा सच: MP के 38 हजार से ज्यादा घरों पर ताले, आखिर कहां चले गए लोग?

जबलपुर से भोपाल-इंदौर तक हजारों मकान खाली, सर्वे के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

भोपाल ( शिखर दर्शन ) // मध्यप्रदेश में जनगणना 2026 के तहत मकानों और परिसंपत्तियों की गणना का पहला चरण पूरा होने के बाद ऐसे आंकड़े सामने आए हैं, जिन्होंने प्रदेश में पलायन और बदलती सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सर्वेक्षण में प्रदेशभर के 38 हजार 827 मकान बंद पाए गए, जिनके मुख्य द्वारों पर ताले लटके मिले। इन आंकड़ों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में लोग अपने घरों को छोड़कर कहां चले गए हैं।

जबलपुर और छतरपुर में सबसे ज्यादा बंद मकान

जनगणना सर्वे के अनुसार संस्कारधानी जबलपुर बंद मकानों की सूची में सबसे ऊपर है। यहां 5,882 मकान बंद मिले। इसके बाद छतरपुर जिले में 5,070 मकानों पर ताले लटके पाए गए। अधिकारियों के अनुसार स्थानीय स्तर पर पूछताछ में रोजगार, शिक्षा और व्यवसाय के लिए दूसरे शहरों एवं राज्यों में पलायन प्रमुख कारण के रूप में सामने आया है।

बड़े शहरों की तस्वीर भी चौंकाने वाली

प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में 4,548 मकान बंद मिले, जबकि राजधानी भोपाल में 3,844 घरों पर ताले लगे पाए गए। ग्वालियर में 2,288 और रीवा में 1,265 मकान बंद दर्ज किए गए। बड़े शहरों में भी इतनी बड़ी संख्या में मकानों का खाली मिलना इस बात का संकेत है कि पलायन केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं है।

गुना और कटनी ने पेश की अलग तस्वीर

जहां अधिकांश जिलों में बंद मकानों की संख्या चिंता का विषय बनी हुई है, वहीं गुना जिले ने सभी को चौंका दिया। सर्वेक्षण के दौरान यहां एक भी मकान बंद नहीं मिला। वहीं कटनी जिले में पूरे सर्वे के दौरान केवल एक मकान पर ताला लगा पाया गया। यह आंकड़ा प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में बेहद अलग माना जा रहा है।

पलायन के पीछे क्या हैं कारण?

विशेषज्ञों का मानना है कि रोजगार, उच्च शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और व्यवसायिक अवसरों की तलाश में बड़ी संख्या में लोग बड़े शहरों या अन्य राज्यों की ओर जा रहे हैं। कई परिवार स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं, जबकि कुछ लोग रोजगार के कारण लंबे समय तक घरों से दूर रहते हैं।

दूसरे चरण में सामने आएगी और स्पष्ट तस्वीर

मकानों और परिसंपत्तियों की गणना का पहला चरण पूरा हो चुका है। अब जनगणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा, जिसमें जनसंख्या, सामाजिक स्थिति, रोजगार, शिक्षा और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां जुटाई जाएंगी। माना जा रहा है कि दूसरे चरण के आंकड़े प्रदेश में पलायन और जनसंख्या के बदलते स्वरूप की और स्पष्ट तस्वीर सामने रखेंगे।

नीति निर्धारण में अहम होंगे आंकड़े

विशेषज्ञों के अनुसार बंद मकानों का यह आंकड़ा केवल एक सांख्यिकीय जानकारी नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक बदलावों का संकेतक भी है। आने वाले समय में यही आंकड़े रोजगार, शहरीकरण और क्षेत्रीय विकास से जुड़ी नीतियों के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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