मध्यप्रदेश

डिजिटल इंडिया में ‘ऑनलाइन घूसकांड’ का खुलासा

PhonePe से ली गई 50 हजार की रिश्वत, रिटायर्ड शिक्षक के एरियर के बदले BEO के बेटे के खाते में ट्रांसफर हुई रकम

मऊगंज ( शिखर दर्शन ) // डिजिटल इंडिया के दौर में अब भ्रष्टाचार भी हाईटेक हो गया है। मध्य प्रदेश के नवगठित मऊगंज जिले से शिक्षा विभाग में ऑनलाइन रिश्वतखोरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक रिटायर्ड शिक्षक को अपने एरियर भुगतान के लिए 50 हजार रुपए की रिश्वत PhonePe के जरिए देनी पड़ी। आरोप है कि यह रकम सीधे ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) देवेंद्र मिश्रा के बेटे के बैंक खाते में ट्रांसफर करवाई गई।

एरियर भुगतान के बदले मांगी गई मोटी रिश्वत

मामला हनुमना ब्लॉक शिक्षा कार्यालय का है। आरोप है कि रिटायर्ड शिक्षक जागेश्वर प्रसाद द्विवेदी के अर्जित अवकाश (Earned Leave) के एरियर भुगतान की फाइल महीनों से दबाकर रखी गई थी। बुजुर्ग शिक्षक लगातार कार्यालय के चक्कर लगाते रहे, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। आखिरकार फाइल आगे बढ़ाने के एवज में 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगी गई।

बताया जा रहा है कि खुद को बचाने और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए BEO देवेंद्र मिश्रा ने रिश्वत नगद लेने के बजाय अपने बेटे के खाते में PhonePe के जरिए तीन किस्तों में रकम ट्रांसफर करवाई।

स्क्रीनशॉट और ऑडियो रिकॉर्डिंग बने सबूत

पीड़ित शिक्षक ने इस पूरे घूसकांड के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई है। उन्होंने ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के स्क्रीनशॉट और ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने रखी हैं, जो कथित रिश्वतखोरी की पुष्टि करते नजर आ रहे हैं। शिक्षक का दावा है कि विभागीय दबाव के कारण उन्होंने दो अन्य शिक्षकों की रिश्वत भी बीआरसी तक पहुंचाई थी।

पुराने विवादों में भी घिरा रहा शिक्षा विभाग

यह पहली बार नहीं है जब मऊगंज जनपद शिक्षा केंद्र पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हों। आरोपित BEO देवेंद्र मिश्रा का नाम पहले भी कथित RO फिल्टर घोटाले में सामने आ चुका है। बताया जाता है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के नाम पर लाखों रुपए का बजट खर्च दिखाया गया, जबकि कई स्कूलों में धरातल पर RO लगाए ही नहीं गए।

हैरानी की बात यह भी रही कि जिन स्कूलों में बिजली कनेक्शन तक नहीं था, वहां भी कागजों में RO मशीन चालू दिखाकर भुगतान कर दिया गया।

डिजिटल सबूतों के बाद भी कार्रवाई पर सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की चुप्पी को लेकर उठ रहा है। PhonePe ट्रांजेक्शन और ऑडियो रिकॉर्डिंग जैसे डिजिटल सबूत सामने आने के बावजूद अब तक आरोपी अधिकारी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे पहले इसी कार्यालय के एक ब्लॉक स्रोत समन्वयक (BRC) को ऑनलाइन पैसे लेने के आरोप में हटाया जा चुका है, लेकिन BEO पर कार्रवाई न होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मीडिया द्वारा जवाब मांगे जाने पर वरिष्ठ अधिकारी कैमरे के सामने बोलने से बचते नजर आए। अब देखना होगा कि डिजिटल घूसकांड के इन पुख्ता सबूतों के बाद प्रशासन कब तक कार्रवाई करता है।

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