दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट सख्त: छत्तीसगढ़ में विशेष बच्चों की शिक्षा व्यवस्था पर जताई चिंता, सरकार को जल्द भर्ती पूरी करने के निर्देश

49 हजार से ज्यादा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए 3981 शिक्षकों की जरूरत, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- समावेशी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी

नई दिल्ली ( शिखर दर्शन ) // छत्तीसगढ़ में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (Children with Special Needs) की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को विशेष शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश देते हुए कहा है कि समावेशी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। कोर्ट ने यह भी माना कि राज्य में विशेष बच्चों की संख्या के मुकाबले शिक्षकों की भारी कमी है, जिसे तत्काल दूर किया जाना चाहिए।

मामले की सुनवाई ‘रजनीश कुमार पांडेय एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य’ प्रकरण में हुई, जिसमें आरसीआई प्रशिक्षित शिक्षक संघ (छत्तीसगढ़) की ओर से अधिवक्ता कौस्तुभ शुक्ला और अधिवक्ता पलाश तिवारी ने प्रभावी पैरवी की। राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया गया कि प्रदेश में विशेष शिक्षकों के कुल 848 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 100 पदों पर भर्ती के लिए 3 अक्टूबर 2025 को विज्ञापन जारी किया गया था। भर्ती प्रक्रिया के तहत अब तक 62 योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है, जबकि 38 पद शिक्षक पात्रता परीक्षा से जुड़े कारणों के चलते अब भी खाली हैं।

155 ब्लॉक रिसोर्स पर्सन और 85 विशेष शिक्षकों को मिला बड़ा मौका

सुनवाई के दौरान आरसीआई प्रशिक्षित शिक्षक संघ ने कोर्ट को बताया कि वर्तमान में प्राथमिक स्तर पर 155 ब्लॉक रिसोर्स पर्सन संविदा आधार पर कार्य कर रहे हैं, जबकि माध्यमिक स्तर पर 85 विशेष शिक्षक निश्चित मानदेय पर सेवाएं दे रहे हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि इन सभी को उनके शैक्षणिक और व्यावसायिक दस्तावेजों सहित स्क्रीनिंग कमेटी के सामने प्रस्तुत होने का अवसर दिया जाए।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि ये सभी उम्मीदवार Rehabilitation Council of India (RCI) द्वारा निर्धारित योग्यताओं और अन्य आवश्यक पात्रताओं को पूरा करते हैं, तो उनकी नियुक्ति पर विधिसम्मत विचार किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि इन 155 ब्लॉक रिसोर्स पर्सन और 85 विशेष शिक्षकों के मामलों पर निर्णय लेने के बाद राज्य सरकार बाकी रिक्त पदों के लिए नई भर्ती प्रक्रिया शुरू कर सकती है।

कोर्ट ने जताई चिंता, कहा- 49 हजार बच्चों के लिए बेहद कम शिक्षक

अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने बेहद अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में 49 हजार से अधिक विशेष आवश्यकता वाले बच्चे हैं, जबकि राज्य में करीब 3981 विशेष शिक्षकों की जरूरत है। ऐसे में वर्तमान व्यवस्था अपर्याप्त है और समावेशी शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए बड़े स्तर पर नियुक्तियां जरूरी हैं।

सर्वोच्च न्यायालय का यह आदेश विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के शिक्षा के अधिकार को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। साथ ही यह फैसला प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा व्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में अहम साबित हो सकता है।

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