21 मई महाकाल आरती: त्रिशूल, त्रिनेत्र और त्रिपुंड से सजा बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप, भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब

ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी पर अलौकिक श्रृंगार, “जय महाकाल” के जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर
उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // धर्मनगरी Shri Mahakaleshwar Jyotirlinga में गुरुवार तड़के बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती श्रद्धा और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर सुबह 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए, जिसके बाद भगवान महाकालेश्वर का विशेष पूजन और दिव्य श्रृंगार किया गया।
पंचामृत अभिषेक के बाद हुआ अलौकिक श्रृंगार
मंदिर के पट खुलते ही पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया। इसके बाद बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शहद एवं फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ।
भांग, चंदन और सुगंधित द्रव्यों से भगवान का श्रृंगार किया गया। बाबा के मस्तक पर त्रिशूल, त्रिनेत्र और त्रिपुंड अर्पित कर उन्हें दिव्य स्वरूप प्रदान किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भस्म आरती में दिखी अद्भुत आध्यात्मिक छटा
भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर “हरिओम” का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार और वैदिक विधानों के बीच भगवान का ध्यान कर कपूर आरती उतारी गई। इसके बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर पवित्र भस्म रमाई गई।
भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की मालाएं और रंग-बिरंगे पुष्प अर्पित किए गए। सुगंधित फूलों और आभूषणों से सजे बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप देखते ही बन रहा था।
श्रद्धालुओं ने मांगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद
सुबह की भस्म आरती में देशभर से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं भी कहीं और बाबा महाकाल से सुख-समृद्धि एवं कल्याण का आशीर्वाद मांगा।
पूरे मंदिर परिसर में “जय श्री महाकाल” और “हर हर महादेव” के जयकारों से भक्तिमय वातावरण बना रहा।



