सिविल लाइन TI पर गिरी गाज: हाईप्रोफाइल केस में “नरमी” पड़ी भारी, SSP ने बदली पूरी तस्वीर

करोड़ों की कथित जालसाजी केस के बाद बढ़ा दबाव, लगातार शिकायतों और कमजोर पुलिसिंग पर कार्रवाई
बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // बिलासपुर पुलिस महकमे में लंबे समय से जिस कार्रवाई की चर्चा चल रही थी, आखिरकार उस पर मुहर लग गई। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने सिविल लाइन थाना प्रभारी निरीक्षक सुमंत राम साहू को हटाते हुए उनकी जगह निरीक्षक किशोर केवट को नई जिम्मेदारी सौंप दी है।
लेकिन यह महज एक प्रशासनिक तबादला नहीं माना जा रहा, बल्कि पुलिस विभाग में इसे “परफॉर्मेंस बेस्ड एक्शन” के तौर पर देखा जा रहा है। लगातार बढ़ते अपराध, कमजोर पुलिसिंग और एक चर्चित हाईप्रोफाइल मामले में पुलिस की कथित नरमी ने आखिरकार कार्रवाई की जमीन तैयार कर दी।
उद्योगपति के भाई से जुड़े केस ने बढ़ाई मुश्किलें
शहर में सबसे अधिक चर्चा उस कथित करोड़ों रुपये की जालसाजी के मामले को लेकर रही, जिसमें उद्योगपति और समाजसेवी प्रवीण झा के भाई प्रफुल्ल झा का नाम सामने आया था। आरोप लगे कि मामले में कूट रचना और फर्जी दस्तावेजों से जुड़े गंभीर आरोप होने के बावजूद सिविल लाइन पुलिस ने अपेक्षाकृत हल्की धाराओं में कार्रवाई की।
कानूनी जानकारों के अनुसार ऐसे मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के साथ 467, 468 और 471 जैसी गंभीर धाराएं सामान्यतः लगाई जाती हैं, जो फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनके इस्तेमाल से संबंधित हैं। इन धाराओं में गैरजमानती अपराध और कठोर सजा का प्रावधान भी शामिल है।
लेकिन चर्चित मामले में इन धाराओं को लेकर उठे सवालों ने पुलिस की निष्पक्षता और कार्यशैली पर बहस छेड़ दी। शहर में यह चर्चा तेज हो गई कि आखिर इतने बड़े मामले में पुलिस का रवैया अपेक्षाकृत “सॉफ्ट” क्यों दिखाई दिया।
बढ़ते अपराधों ने भी छीनी कुर्सी
सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई केवल एक केस तक सीमित नहीं रही। पिछले कुछ महीनों में सिविल लाइन थाना क्षेत्र चोरी, मारपीट, अवैध गतिविधियों और कई विवादित घटनाओं को लेकर लगातार सुर्खियों में बना हुआ था।
स्थानीय लोगों के बीच थाना स्तर की पुलिसिंग को लेकर असंतोष बढ़ रहा था। शिकायतों के निराकरण में देरी, कमजोर मॉनिटरिंग और अपराध नियंत्रण में अपेक्षित सख्ती नहीं दिखने को लेकर भी सवाल उठ रहे थे। बताया जा रहा है कि विभागीय स्तर पर सिविल लाइन थाने की कार्यप्रणाली की समीक्षा काफी समय से चल रही थी।
SSP रजनेश सिंह का सख्त संदेश
पुलिस विभाग के सूत्रों की मानें तो SSP रजनेश सिंह लगातार जिले की कानून व्यवस्था और थाना स्तर की कार्यप्रणाली पर फीडबैक ले रहे थे। विवादित मामलों और बढ़ते अपराधों के बीच आखिरकार उन्होंने सख्त कदम उठाते हुए थाना प्रभारी बदलने का निर्णय लिया।
विभाग में इस कार्रवाई को एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है कि अब केवल पद पर बने रहना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जमीन पर प्रभावी कानून व्यवस्था और जवाबदेही भी दिखाई देनी चाहिए।
रिटायरमेंट से पहले हटे सुमंत राम साहू
सूत्रों के अनुसार निरीक्षक सुमंत राम साहू इसी माह सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में रिटायरमेंट से ठीक पहले उनका हटाया जाना पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि आदेश में अन्य अधिकारियों के तबादले भी शामिल हैं, लेकिन सबसे ज्यादा फोकस सिविल लाइन थाने के बदलाव पर ही बना हुआ है।
अब सबकी निगाहें नए थाना प्रभारी किशोर केवट पर टिकी हैं, क्योंकि सिविल लाइन थाना शहर की कानून व्यवस्था का सबसे अहम केंद्र माना जाता है।



