आपदा राहत से लेकर नामांतरण तक… हर फाइल पर ‘रेट’ तय! बिलासपुर कलेक्ट्रेट में रिश्वतखोरी का बड़ा खेल बेनकाब

नामांतरण, सीमांकन और राहत प्रकरणों में मोटी रकम मांगने के आरोप, लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद मचा हड़कंप

बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // बिलासपुर कलेक्ट्रेट में पदस्थ एक लिपिक पर सरकारी कामकाज के नाम पर रिश्वतखोरी का बड़ा आरोप सामने आया है। आरोप है कि नामांतरण, सीमांकन से लेकर आपदा राहत से जुड़े मामलों तक में फाइल आगे बढ़ाने के लिए मोटी रकम की मांग की जाती थी। मामले में लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
13 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया लिपिक
जानकारी के अनुसार एडीएम कार्यालय में पदस्थ लिपिक विजय पांडे को लोकायुक्त टीम ने 13 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। आरोप था कि वह नामांतरण से जुड़ी फाइल को आगे बढ़ाने के एवज में पैसे मांग रहा था।
कार्रवाई के दौरान लोकायुक्त टीम ने कार्यालय और संबंधित ठिकानों पर जांच की, जहां कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और फाइलें भी मिलीं। इस घटना के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में पूरे दिन चर्चाओं का दौर चलता रहा।
आपदा पीड़ितों की मदद को भी बनाया कमाई का जरिया
मामले की सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों को मिलने वाली राहत राशि से जुड़े प्रकरणों में भी कथित रूप से पैसे मांगे जाते थे। आरोप है कि बिना रकम दिए फाइलें आगे नहीं बढ़ाई जाती थीं।
सूत्रों के अनुसार कई ग्रामीण और जरूरतमंद लोग महीनों तक कार्यालयों के चक्कर काटते रहे, लेकिन कार्रवाई तभी होती थी जब “सुविधा शुल्क” दिया जाता था।
एडीएम कार्यालय की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस पूरे मामले के बाद एडीएम कार्यालय की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। चर्चा यह भी है कि नामांतरण और सीमांकन जैसे मामलों में लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही थी।
कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद लोगों का कहना है कि आम नागरिकों को छोटे-छोटे कामों के लिए भी कई स्तरों पर परेशान होना पड़ता है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।
लोकायुक्त जांच के बाद बढ़ सकती हैं मुश्किलें
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद अब मामले में अन्य कर्मचारियों और संबंधित प्रकरणों की भी जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने पर कई और खुलासे हो सकते हैं।
प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है, वहीं आम लोगों में उम्मीद जगी है कि सरकारी दफ्तरों में फैले रिश्वतखोरी के नेटवर्क पर अब सख्ती से अंकुश लगाया जाएगा।



