एक साल से कान में फंसा लोहे का छर्रा, अंबेडकर अस्पताल के डॉक्टरों ने बचाई बच्ची की सुनने की क्षमता

रायपुर ( शिखर दर्शन ) // डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय के चिकित्सकों ने नौ वर्षीय बच्ची की सुनने की क्षमता बचाते हुए एक जटिल शल्यक्रिया में बड़ी सफलता हासिल की है। बच्ची के कान में करीब एक वर्ष से फंसे लोहे के छर्रे को सुरक्षित निकालने के साथ ही क्षतिग्रस्त कान के पर्दे और सुनने वाली सूक्ष्म हड्डियों का सफल पुनर्निर्माण किया गया।
एक साल तक कान में फंसा रहा छर्रा
कान, नाक एवं गला (ईएनटी) विभागाध्यक्ष डॉ. हंसा बंजारा ने बताया कि खेल-खेल में बच्ची के बाएं कान में लोहे का छर्रा चला गया था। लंबे समय तक इलाज नहीं होने के कारण वह मध्य कान तक पहुंच गया, जिससे कान का पर्दा और सुनने वाली सूक्ष्म हड्डियां गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गईं।
माइक्रोस्कोपिक सर्जरी से किया सफल उपचार
ईएनटी विभाग की टीम ने माइक्रोस्कोपिक शल्यक्रिया के माध्यम से सावधानीपूर्वक छर्रे को बाहर निकाला। इसके बाद बच्ची के स्वयं के ऊतकों की सहायता से नया कान का पर्दा तथा सुनने वाली हड्डियों का पुनर्निर्माण किया गया। इस प्रक्रिया को टिम्पैनोप्लास्टी और ऑसिक्युलोप्लास्टी कहा जाता है।
समय पर इलाज से टला बड़ा खतरा
चिकित्सकों के अनुसार यदि समय पर ऑपरेशन नहीं किया जाता तो बच्ची की सुनने की क्षमता हमेशा के लिए समाप्त हो सकती थी। इसके अलावा संक्रमण के आंतरिक कान या मस्तिष्क तक फैलने का भी गंभीर खतरा था।
चिकित्सकों की टीम को मिली सफलता
अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने बताया कि यह अत्यंत चुनौतीपूर्ण शल्यक्रिया थी। सफल ऑपरेशन के बाद बच्ची स्वस्थ है और चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार जारी है। इस शल्यक्रिया में डॉ. दुर्गेश गजेंद्र, स्नातकोत्तर छात्रा डॉ. ज्योति किरण तथा निश्चेतना विभाग की डॉ. अमृता ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।



