मध्यप्रदेश

नर्मदा तट पर बनेगा शक्तिधाम, एक परिसर में होंगे 51 शक्तिपीठों के दर्शन

इंदौर ( शिखर दर्शन ) // मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के बड़वाह में नर्मदा नदी के तट पर प्रस्तावित शक्तिधाम परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में परियोजना के स्वरूप, उद्देश्य और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक भैय्याजी जोशी ने कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करते हुए इसे भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक दूरदर्शी पहल बताया।

30 एकड़ में विकसित होगा शक्तिधाम

बैठक में बताया गया कि शक्तिधाम लगभग 30 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। यह परिसर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से करीब 19 किलोमीटर दूर नर्मदा तट पर बनाया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य देश के 51 शक्तिपीठों को एक ही स्थान पर स्थापित करना है, ताकि श्रद्धालु एक ही परिसर में सभी शक्तिपीठों के दर्शन कर सकें।

आस्था के साथ शोध और जनकल्याण का केंद्र

परियोजना की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि शक्तिधाम केवल धार्मिक स्थल नहीं होगा, बल्कि शक्ति, श्रद्धा, शास्त्र और साधना पर आधारित एक समग्र अनुसंधान एवं जनकल्याण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। परिसर का निर्माण स्वस्तिक आधारित स्थापत्य शैली में होगा। इसके केंद्र में भारत माता की भव्य प्रतिमा, ध्यान एवं साधना केंद्र तथा आकर्षक उद्यान विकसित किए जाएंगे।

पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

परियोजना में गौशाला, धर्मशाला, अतिथि गृह, शोध केंद्र, शिक्षा एवं सेवा से जुड़ी विभिन्न इकाइयों की स्थापना भी प्रस्तावित है। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

भैय्याजी जोशी ने किया जनभागीदारी का आह्वान

भैय्याजी जोशी ने कहा कि शक्तिधाम भारतीय संस्कृति में शक्ति की अवधारणा को आस्था, विज्ञान और सेवा से जोड़ने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना विश्व के सामने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का सशक्त स्वरूप प्रस्तुत करेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से सेवा, समर्पण और संगठन की भावना के साथ इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

जनसंपर्क और धन संग्रह पर भी हुई चर्चा

बैठक में परियोजना के विस्तार, जनसंपर्क अभियान, जनसहभागिता और धन संग्रह की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया। उपस्थित सदस्यों ने शक्तिधाम के उद्देश्य को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने तथा समाज की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।

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