रायपुर संभाग

नकटी विस्थापन पर कांग्रेस का बड़ा हमला, 1931 के दस्तावेज लहराकर सरकार पर भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने का आरोप

जांच समिति की प्रेसवार्ता में बोले धनेंद्र साहू – चारागाह की जमीन पर ग्रामीणों का अधिकार, भाजपा नेताओं की जमीनों का भी हो ऑडिट

रायपुर ( शिखर दर्शन ) // नवा रायपुर के नकटी गांव में हुई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस की जांच समिति ने सोमवार को प्रेसवार्ता कर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। पूर्व मंत्री धनेंद्र साहू ने 1930-31 की चकबंदी रिपोर्ट, राजस्व अभिलेख और वर्ष 2024 में आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा जारी पत्र का हवाला देते हुए दावा किया कि संबंधित भूमि मूलतः सम्मिलित चारागाह है, जिस पर ग्रामीणों का वैधानिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीणों की बस्ती हटाकर भू-माफियाओं और प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

1931 के दस्तावेज दिखाकर ग्रामीणों के अधिकार का दावा

प्रेसवार्ता में धनेंद्र साहू ने 1930-31 की चकबंदी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि उस समय के राजस्व अभिलेखों में संबंधित भूमि सम्मिलित चारागाह के रूप में दर्ज है। उन्होंने दावा किया कि रिकॉर्ड में तत्कालीन नंबरदार एवं मालगुजार के साथ अनेक भू-स्वामियों के नाम दर्ज हैं तथा वर्षों से इस भूमि का राजस्व भी जमा होता रहा है। उनके अनुसार ऐसी भूमि पर निर्णय लेने का अधिकार ग्रामसभा के पास होता है और बिना विधिक प्रक्रिया के इसे किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग में नहीं लाया जा सकता।

2024 के सरकारी पत्र पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेताओं ने अक्टूबर 2024 में आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव द्वारा रायपुर कलेक्टर को भेजे गए पत्र का भी उल्लेख किया। धनेंद्र साहू ने कहा कि पत्र में खसरा नंबर 460, 465, 524, 698, 700 और 701 की लगभग 29.172 हेक्टेयर भूमि का उल्लेख करते हुए वहां बने कच्चे-पक्के मकानों और बढ़ते अतिक्रमण का जिक्र है तथा भूमि शीघ्र उपलब्ध कराने की बात कही गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि हाउसिंग बोर्ड भूमि की मांग से इनकार कर रहा है, तो फिर इस पत्र का उद्देश्य क्या था।

भाजपा नेताओं की जमीनों के ऑडिट की मांग

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नकटी गांव के आसपास प्रभावशाली लोगों और भाजपा से जुड़े नेताओं की भी जमीनें हैं, लेकिन कार्रवाई केवल गरीब ग्रामीणों के खिलाफ की गई। धनेंद्र साहू ने मांग की कि पूरे क्षेत्र की जमीनों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन-किन लोगों के पास वहां भूमि है और किन परिस्थितियों में उसका उपयोग किया जा रहा है।

‘सरकारी योजनाओं का लाभ मिला, फिर उजाड़ना क्यों?’

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जिन परिवारों को हटाया गया, उन्हें वर्षों से प्रधानमंत्री आवास योजना, नल-जल योजना, सड़क, बिजली जैसी सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलता रहा है। यदि शासन स्वयं उन्हें वैध लाभार्थी मानता रहा है, तो अचानक उन्हें अतिक्रमणकारी बताकर बेदखल करना कई सवाल खड़े करता है। उनका दावा है कि ग्रामीणों की बसाहट पंचायत और ग्रामसभा की प्रक्रिया के तहत विकसित हुई थी।

पीड़ितों के साथ खड़ी रहेगी कांग्रेस

प्रेसवार्ता में कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर पूरे मामले में तथ्य छिपाने और जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं ने कहा कि नकटी मामले में प्रभावित ग्रामीणों को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस कानूनी, राजनीतिक और जनआंदोलन के स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग करेगी।

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