झोपड़ी में ‘हॉस्पिटल’ का खेल! लकड़ी से टंगी ग्लूकोज, मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़

कटनी में झोलाछाप डॉक्टरों का कारनामा उजागर, जर्जर कच्ची झोपड़ी में चल रहा था कथित चिकित्सालय
कटनी ( शिखर दर्शन ) // मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। कटनी जिले के विजयराघवगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम बकेली में एक जर्जर झोपड़ी के भीतर कथित अस्पताल संचालित किए जाने का मामला सामने आया है। यहां मरीजों का इलाज ऐसे हालात में किया जा रहा था, जिसे देखकर कोई भी हैरान रह जाए। लकड़ी के सहारे ग्लूकोज की बोतल लटकाकर मरीजों को ड्रिप चढ़ाई जा रही थी, जबकि अस्पताल नाम की यह व्यवस्था एक कच्ची झोपड़ी तक सीमित थी।
झोपड़ी बनी अस्पताल, लकड़ी बनी मेडिकल स्टैंड
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत सिगुनपुरा के ग्राम बकेली में “निखिलेश्वर चिकित्सालय” नाम से एक कथित अस्पताल संचालित किया जा रहा था। झोपड़ी की छत को संभालने के लिए लगाई गई लकड़ियों का उपयोग ड्रिप स्टैंड के रूप में किया जा रहा था। इन्हीं लकड़ियों में रस्सी बांधकर ग्लूकोज की बोतल टांगी गई थी और मरीजों का उपचार किया जा रहा था।
अस्वच्छ माहौल में चल रहा था इलाज
मौके पर बड़ी मात्रा में एलोपैथिक दवाइयां और इंजेक्शन भी पाए गए। धूल, गंदगी और संक्रमण की आशंका वाले वातावरण में मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे माहौल में उपचार मरीजों के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है और संक्रमण का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
बिना पर्याप्त अनुमति चल रहा था उपचार
मिली जानकारी के मुताबिक कथित चिकित्सालय का संचालन डॉ. सी.पी. सिंह नाहर (आयुष) और डॉ. भूपेंद्र सिंह नाहर द्वारा किया जा रहा था। आरोप है कि ग्रामीण क्षेत्र में बिना पर्याप्त विशेषज्ञता और आवश्यक अनुमति के एलोपैथिक पद्धति से इलाज किया जा रहा था, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती थी।
स्वास्थ्य विभाग ने गठित की जांच टीम
मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. राज सिंह ठाकुर ने कहा कि किसी झोपड़ी या बिना मान्यता प्राप्त भवन में अस्पताल अथवा क्लीनिक संचालित करना नियमों के विरुद्ध है। मामले की जांच के लिए विकासखंड स्तर पर विशेष टीम गठित कर दी गई है।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
सीएमएचओ ने बताया कि जांच टीम को मौके पर भेजा गया है और पूरे मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच में यदि नियमों के उल्लंघन और अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।



