नक्सलवाद के साए से निकलकर विकास की नई रोशनी में चमक रहा बस्तर

कभी गोलियों की गूंज से दहला इलाका, अब विकास और विश्वास की नई पहचान बना बस्तर
रायपुर ( शिखर दर्शन ) // कभी नक्सल हिंसा, बंदूक और भय की पहचान बन चुका बस्तर अब तेजी से बदलती तस्वीर के साथ देश के सामने नई मिसाल पेश कर रहा है। जंगलों में जहां कभी गोलियों की आवाज गूंजती थी, वहीं अब विकास, जनसुविधाओं और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी जा रही है। छत्तीसगढ़ में डबल इंजन सरकार और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर अब भय से भरोसे और संघर्ष से विकास की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
अमित शाह के दौरे ने दिया बदलाव का बड़ा संदेश

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बस्तर दौरा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे नक्सलवाद से विकास की ओर बढ़ते नए बस्तर की घोषणा के रूप में देखा जा रहा है। गृह मंत्री ने स्पष्ट संकेत दिया कि अब बस्तर की पहचान बंदूक नहीं, बल्कि लोकतंत्र, विकास और अवसर होंगे।
सुरक्षा कैंप अब बन रहे जनसेवा केंद्र
बस्तर के अंदरूनी इलाकों में नक्सल विरोधी अभियानों के लिए बनाए गए सुरक्षा कैंप अब ग्रामीणों के लिए जनसेवा केंद्र में बदलते दिखाई दे रहे हैं। नेतानार स्थित “शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा” इसका बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।

यहां अब ग्रामीणों को आधार कार्ड, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आय और जाति प्रमाण पत्र जैसी 370 से अधिक सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। आयुष्मान कार्ड, शिक्षा और आंगनबाड़ी जैसी योजनाओं की पहुंच भी अब गांव तक हो रही है।
डिजिटल गवर्नेंस से बढ़ा ग्रामीणों का भरोसा
वर्षों तक उपेक्षा और भय का सामना करने वाले ग्रामीण अब पहली बार सरकारी व्यवस्थाओं को अपने गांव के भीतर महसूस कर रहे हैं। डिजिटल गवर्नेंस और प्रशासनिक पहुंच ने आदिवासी क्षेत्रों में भरोसे का नया माहौल तैयार किया है।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था, लेकिन अब वही सेवाएं गांव में ही मिलने लगी हैं।
महिलाओं की आत्मनिर्भरता बनी बदलाव की असली तस्वीर

बस्तर में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए स्व-सहायता समूहों और बैंक सखी जैसी योजनाओं पर विशेष काम किया जा रहा है। इमली प्रसंस्करण, लघु वन उपज और स्थानीय उत्पादों से जुड़ी महिलाएं अब सालाना अच्छी आय अर्जित कर रही हैं।
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि अब उन्हें केवल सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा, बल्कि सम्मान और आत्मनिर्भरता का नया रास्ता भी खुला है।
पुनर्वास के जरिए मुख्यधारा में लौट रहे पूर्व नक्सली
सरकार अब केवल सुरक्षा अभियान तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंसा छोड़ चुके लोगों के पुनर्वास पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। समर्पण करने वाले युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

केंद्र सरकार द्वारा जारी फंड के जरिए ऐसे लोगों को समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक तरीके से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
‘बस्तर 2.0’ विजन के जरिए विकास को नई गति
सरकार का लक्ष्य केवल नक्सलवाद खत्म करना नहीं, बल्कि बस्तर को देश और दुनिया के सामने नई पहचान दिलाना भी है। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी पर तेजी से काम किया जा रहा है।

इसके साथ ही बस्तर की कला, हस्तशिल्प, संस्कृति और पर्यटन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। बस्तर ओलंपिक, स्थानीय व्यंजन और जनजातीय संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयास इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।
“50 साल के नुकसान की भरपाई 5 साल में” : अमित शाह
गृह मंत्री अमित शाह ने अपने दौरे के दौरान कहा कि बस्तर को पिछले कई दशकों में जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई आने वाले कुछ वर्षों में कर दी जाएगी। उन्होंने इसे सुरक्षा बलों की बहादुरी और राज्य सरकार की विकास नीति का परिणाम बताया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बने बदलाव की बड़ी धुरी
बस्तर में दिखाई दे रहे इस परिवर्तन के केंद्र में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की कार्यशैली को भी अहम माना जा रहा है। सुरक्षा और विकास को साथ लेकर चलने की रणनीति ने आदिवासी क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव की नई उम्मीद जगाई है।

आज बस्तर केवल नक्सलवाद से बाहर निकलने की कहानी नहीं लिख रहा, बल्कि वह यह भी साबित कर रहा है कि यदि नीयत, नीति और नेतृत्व मजबूत हो, तो सबसे कठिन क्षेत्र भी विकास की नई मिसाल बन सकते हैं।



