अंबेडकर जयंती पर मानवता का संदेश: MP की जेलों से 87 बंदी रिहा, भोपाल में 13 को मिली नई जिंदगी

सुधारात्मक न्याय की मिसाल, जुर्माना भरकर 3 कैदियों को दिलाई आजादी, समाज में लौटने का मौका
भोपाल ( शिखर दर्शन ) // Ambedkar Jayanti के अवसर पर मध्यप्रदेश सरकार ने एक बड़ा और मानवीय निर्णय लेते हुए प्रदेश की विभिन्न जेलों से 87 बंदियों को रिहा किया। इस पहल के तहत Bhopal Central Jail से 13 बंदियों को भी नई जिंदगी की शुरुआत का अवसर मिला।
अच्छे आचरण का मिला इनाम, सुधार की राह पर सरकार
यह निर्णय गृह विभाग की उस नीति के अंतर्गत लिया गया, जिसका उद्देश्य अच्छे आचरण वाले बंदियों को प्रोत्साहित करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाना है। आजीवन कारावास की सजा काट रहे पात्र कैदियों को समयपूर्व रिहाई का लाभ दिया गया, जबकि अन्य बंदियों को सजा में विशेष छूट प्रदान की गई।
एपीसीआर की पहल से 3 बंदियों को मिली आजादी
इस मौके पर APCR की ओर से एक सराहनीय पहल देखने को मिली। संस्था के अध्यक्ष Anwar Pathan ने तीन बंदियों का जुर्माना भरकर उन्हें रिहाई दिलाई। आर्थिक तंगी के कारण ये बंदी जुर्माना नहीं चुका पा रहे थे, जिससे उनकी रिहाई अटक गई थी। इस पहल से महेश ठाकुर, श्याम सिंह और अनीश खान को भी स्वतंत्रता मिल सकी।
साल में 5 खास मौकों पर मिलती है राहत
गृह विभाग की नीति के अनुसार, वर्ष में पांच प्रमुख अवसरों—गणतंत्र दिवस, अंबेडकर जयंती, स्वतंत्रता दिवस, गांधी जयंती और राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस—पर बंदियों को सजा में छूट या समयपूर्व रिहाई का लाभ दिया जाता है। इन मौकों पर उनके आचरण और सजा की अवधि के आधार पर मामलों की समीक्षा की जाती है।
जेल व्यवस्था पर सकारात्मक असर
जेल अधीक्षक Rakesh Bhangre ने बताया कि रिहा किए गए बंदी अपनी सजा के 14 वर्ष पूरे कर चुके थे और उनका आचरण संतोषजनक पाया गया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल से जेलों में अनुशासन बेहतर होता है और ओवरक्राउडिंग की समस्या को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है।
रिहा बंदियों का संकल्प: अब अपराध से दूरी
जेल से बाहर आए बंदियों ने भावुक होकर कहा कि उन्हें अपनी गलतियों का एहसास हो चुका है और अब वे समाज में एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में जीवन बिताना चाहते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपराध से दूर रहें और सही रास्ता अपनाएं।



