दिल्ली में पाबंदियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बैरिकेडिंग की समीक्षा और मेट्रो सेवा सामान्य रखने के निर्देश

सीजेपी प्रदर्शन मामले में अवैध हिरासत और पुलिस कार्रवाई पर भी मांगा जवाब, मंगलवार को फिर होगी सुनवाई
नई दिल्ली ( शिखर दर्शन ) //
सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में लगाई गई पाबंदियों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। रविवार को हुई विशेष सुनवाई में अदालत ने अधिकारियों को शहरभर में बैरिकेडिंग की समीक्षा करने, मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रखने तथा इंटरनेट सेवाओं को कानून के अनुसार निर्बाध बनाए रखने के निर्देश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, लेकिन आम लोगों की आवाजाही और आवश्यक सेवाएं अनावश्यक रूप से बाधित नहीं होनी चाहिए।
मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदी को लेकर डीएमआरसी से मांगा नक्शा
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) से उन स्टेशनों का नक्शा मांगा, जहां प्रदर्शन के दौरान प्रवेश और निकास पर प्रतिबंध लगाया गया था। अदालत ने सवाल किया कि शुरुआत में 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में 45 स्टेशनों पर पाबंदी क्यों लगाई गई।
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि शनिवार रात 10 बजे तक सभी मेट्रो स्टेशन दोबारा खोल दिए गए थे और इंटरनेट सेवाएं भी बहाल हो चुकी थीं। अदालत ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लेने की बात कही और मेट्रो सेवाओं को सामान्य समय-सारणी के अनुसार चलाने का निर्देश दिया।
अवैध हिरासत पर रोक, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के अधिकारों पर जोर
अदालत ने कहा कि दिल्ली में लोगों की आवाजाही कानून के मुताबिक सुचारु रूप से जारी रहनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति को कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना हिरासत में नहीं लिया जा सकता। विशेष रूप से उन लोगों के मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है, जो प्रतिबंधित क्षेत्रों से बाहर शांतिपूर्ण और बिना हथियार के सभा या प्रदर्शन कर रहे हैं।
सुनवाई में प्रदर्शनकारियों, राजनीतिक नेताओं, वकीलों और पत्रकारों को हिरासत में लेने तथा पुलिस की कथित कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए गए। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से इन आरोपों पर जवाब मांगा।
वकीलों ने उठाया पुलिस कार्रवाई का मुद्दा
सुनवाई के दौरान वकीलों ने प्रदर्शन के दौरान कथित मारपीट और हिरासत से जुड़े आरोप अदालत के सामने रखे। कुछ वकीलों ने अदालत परिसर के आसपास प्रतिबंधों और बैरिकेडिंग पर भी आपत्ति जताई।
अदालत ने कहा कि वकीलों को अपने पेशेवर दायित्व निभाने से नहीं रोका जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान कुछ वकीलों ने नारेबाजी भी की, जिस पर अदालत ने अनुशासन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
केंद्र और संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब
सीजेपी प्रदर्शन से जुड़े मामलों में दाखिल याचिकाओं में मेट्रो स्टेशनों को बंद करने, सार्वजनिक परिवहन प्रभावित होने, कथित अवैध हिरासत और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। अदालत ने संबंधित पक्षों से इन मुद्दों पर जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट ने बैरिकेडिंग की आवश्यकता की समीक्षा करने और कानून-व्यवस्था तथा यातायात की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आम लोगों की आवाजाही सुचारु रखने पर जोर दिया। मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।



