CEC के इस्तीफे की मांग पर वकीलों का मार्च, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया
SIR प्रक्रिया के विरोध में जंतर-मंतर कूच; सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने वकीलों के खिलाफ बल प्रयोग पर जताई आपत्ति

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने अदालत परिसर से जंतर-मंतर की ओर मार्च निकाला। हालांकि, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रास्ते में रोककर हिरासत में ले लिया। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग से जवाब मांग रहे हैं।
नई दिल्ली ( शिखर दर्शन ) //
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने हस्तक्षेप की मांग की
प्रदर्शन के दौरान वकीलों को हिरासत में लिए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) तक पहुंच गया है। एसोसिएशन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है।
SCBA ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास शांतिपूर्ण विरोध कर रहे वरिष्ठ और युवा वकीलों, विशेषकर महिला वकीलों, के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया और उन्हें हिरासत में लिया गया। एसोसिएशन ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई है।
23 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती का दावा
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। रिपोर्टों के अनुसार, राजधानी में 23 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। कई इलाकों में बैरिकेडिंग की गई और प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थल तक पहुंचने से रोकने के इंतजाम किए गए।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया था। इसके पीछे आवेदन देर से दिए जाने और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका का हवाला दिया गया। पुलिस की ओर से प्रदर्शन के दौरान शांति बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए।
विमान के अंदर से CJP के तीन नेताओं को हिरासत में लेने का दावा
CJP के मुताबिक, पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को मुंबई से दिल्ली पहुंचने के बाद विमान के अंदर से ही हिरासत में ले लिया गया। तीनों नेता मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे।
पार्टी की ओर से साझा किए गए वीडियो में अभिजीत दीपके पुलिस अधिकारियों से कहते सुनाई देते हैं कि वे गिरफ्तारी देने के लिए आए हैं। CJP का दावा है कि पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने की जानकारी दी और इसके बाद हिरासत में ले लिया।
SIR को लेकर क्यों हो रहा है विरोध?
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया इस आंदोलन का प्रमुख मुद्दा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटने का खतरा है। इसी को लेकर वे चुनाव आयोग से जवाबदेही तय करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग और केंद्र सरकार ने मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को दुरुस्त करना तथा डुप्लिकेट और अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना है।
आंदोलन में छात्र और युवा संगठन भी शामिल
SIR के विरोध में चल रहे आंदोलन में वकीलों के अलावा छात्र और युवा संगठनों की भागीदारी भी बताई जा रही है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और पात्र मतदाताओं के मतदान के अधिकारों की रक्षा हो।
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए हैं। वहीं, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और प्रदर्शनकारियों के आरोपों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।



