तीसरे विश्व युद्ध की आहट ? दुनिया के कई देशों में इमरजेंसी अलर्ट, नागरिकों को घरों में राशन-पानी और दवाइयां रखने की सलाह; ट्रम्प के बयान से बढ़ी चिंता !

तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं के बीच सतर्क हुई दुनिया! कई देशों ने नागरिकों को घरों में राशन, पानी और दवाइयां रखने की दी सलाह
अमेरिका से यूरोप और जापान तक आपातकालीन तैयारियों पर जोर, कहीं 72 घंटे तो कहीं एक सप्ताह तक आत्मनिर्भर रहने की तैयारी; जानिए आखिर क्यों सरकारें लोगों को पहले से आगाह कर रही हैं
नई दिल्ली ( शिखर दर्शन ) // दुनिया के बदलते सुरक्षा परिदृश्य, प्राकृतिक आपदाओं और बढ़ते तकनीकी जोखिमों के बीच कई विकसित देश अपने नागरिकों को आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार रहने की सलाह दे रहे हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और यूरोप के कई देशों में सरकारें लोगों को घरों में पर्याप्त भोजन, पीने का पानी, जरूरी दवाइयां और अन्य आवश्यक वस्तुएं रखने के लिए जागरूक कर रही हैं।
इन तैयारियों का उद्देश्य युद्ध की स्थिति पैदा होने की घोषणा करना नहीं, बल्कि ऐसी किसी भी परिस्थिति में नागरिकों को शुरुआती दिनों तक आत्मनिर्भर बनाए रखना है, जब बिजली, पानी, संचार और परिवहन जैसी बुनियादी सेवाएं बाधित हो सकती हैं। प्राकृतिक आपदाओं, साइबर हमलों, बिजली संकट और सैन्य संघर्ष जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ये दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं।
किन देशों ने जारी की आपातकालीन तैयारी की सलाह ?
यूरोप के कई देशों में नागरिकों को संकट के समय अपनी बुनियादी जरूरतें स्वयं पूरी करने के लिए तैयार रहने को कहा जा रहा है। इनमें जर्मनी, नॉर्वे, फिनलैंड, फ्रांस और स्वीडन प्रमुख हैं।
- जर्मनी: संघीय नागरिक सुरक्षा एजेंसी ने घरों में लगभग 10 दिनों तक के भोजन और पेयजल का भंडार रखने की सलाह दी है। हालांकि, कम से कम तीन दिनों की तैयारी से शुरुआत करने पर भी जोर दिया गया है।
- नॉर्वे: सरकार ने नागरिकों को कम से कम एक सप्ताह तक अपनी जरूरतें स्वयं पूरी करने की तैयारी रखने को कहा है। इसमें भोजन, पानी, दवाइयां, गर्म कपड़े और संचार के साधन शामिल हैं।
- फिनलैंड: नागरिकों को किसी बड़े संकट की स्थिति में कम से कम 72 घंटे तक आत्मनिर्भर रहने की सलाह दी गई है। suomi.fi
- फ्रांस: सरकार ने 72 घंटे की आपातकालीन किट तैयार रखने का अभियान चलाया है। इसमें पानी, भोजन, दवाइयां, रेडियो, नकदी और जरूरी दस्तावेज शामिल हैं।
- स्वीडन: सरकार ने ‘इन केस ऑफ क्राइसिस ऑर वॉर’ नाम से विशेष पुस्तिका जारी कर नागरिकों को संकट अथवा युद्ध की स्थिति में कम से कम एक सप्ताह तक अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए तैयार रहने को कहा है।
यूरोपीय देशों की इन तैयारियों से स्पष्ट है कि सरकारें अब केवल प्राकृतिक आपदाओं ही नहीं, बल्कि साइबर हमलों, ऊर्जा संकट और सैन्य संघर्ष जैसी परिस्थितियों को भी अपनी नागरिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल कर रही हैं।
कितने दिनों का राशन और पानी रखने की सलाह ?
अलग-अलग देशों की सलाह में तैयारी की अवधि अलग-अलग है। कहीं 72 घंटे यानी तीन दिन तो कहीं सात से दस दिनों तक की जरूरतों का इंतजाम रखने पर जोर दिया गया है।
इसका एक प्रमुख उदाहरण जर्मनी है, जहां प्रति व्यक्ति लगभग 10 दिनों के भोजन और पर्याप्त पेयजल का भंडार रखने की सलाह दी गई है। नॉर्वे और स्वीडन में एक सप्ताह की तैयारी पर जोर है, जबकि फ्रांस और फिनलैंड में 72 घंटे की जरूरतों को प्राथमिक आधार बनाया गया है।
ब्रिटेन और जापान की क्या है तैयारी ?
ब्रिटेन: ब्रिटिश सरकार ने अपने ‘बी रेडी’ अभियान के तहत नागरिकों को कम से कम तीन दिनों की आपातकालीन तैयारी रखने की सलाह दी है। इसमें प्रति व्यक्ति प्रतिदिन लगभग तीन लीटर पीने का पानी, लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला भोजन, जरूरी दवाइयां, प्राथमिक उपचार सामग्री, टॉर्च, अतिरिक्त बैटरियां, रेडियो, पावर बैंक और नकदी रखने की सलाह शामिल है।
जापान: भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को देखते हुए जापान में भी नागरिकों को कम से कम तीन दिनों और संभव हो तो एक सप्ताह तक की जरूरतों का सामान रखने की सलाह दी जाती है। इसमें भोजन, पानी, दवाइयां, टॉर्च, रेडियो, अतिरिक्त बैटरियां और जरूरी दस्तावेज शामिल हैं।
आखिर क्यों बढ़ रही है आपातकालीन तैयारी ?
सरकारों की चिंता के पीछे कई तरह के जोखिम हैं। इनमें भीषण मौसम, बाढ़, भूकंप, जंगलों में आग, बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित होना, साइबर हमले, संचार व्यवस्था ठप होना और संभावित सैन्य संघर्ष शामिल हैं।
किसी बड़े संकट के दौरान परिवहन और आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। दुकानें बंद हो सकती हैं, एटीएम और डिजिटल भुगतान सेवाएं काम करना बंद कर सकती हैं तथा राहत पहुंचने में समय लग सकता है। ऐसे में घरों में आवश्यक वस्तुओं का सीमित भंडार नागरिकों को शुरुआती मुश्किल दिनों से निपटने में मदद कर सकता है।
क्या तीसरे विश्व युद्ध की आशंका है वजह ?
दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्धों के बीच तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं पर चर्चा जरूर हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों को भी इस संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, विभिन्न देशों की आपातकालीन तैयारियों को सीधे तौर पर तीसरे विश्व युद्ध की निश्चित आशंका या उसकी घोषणा मानना उचित नहीं होगा।
दरअसल, इन देशों की आधिकारिक सलाह का मूल उद्देश्य किसी एक युद्ध की आशंका नहीं, बल्कि हर तरह के बड़े संकट के दौरान नागरिकों की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना है। सरकारें चाहती हैं कि आपातकालीन स्थिति में राहत एवं बचाव एजेंसियां सबसे जरूरतमंद लोगों तक पहले पहुंच सकें और बाकी नागरिक भी कुछ दिनों तक अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी कर सकें।
संपादकीय दृष्टि से महत्वपूर्ण बात: इन तैयारियों का संदेश भारत सहित दुनिया के सभी देशों के नागरिकों के लिए भी प्रासंगिक है। घर में थोड़ा अतिरिक्त राशन, पीने का पानी, जरूरी दवाइयां, टॉर्च, पावर बैंक और प्राथमिक उपचार सामग्री रखना घबराहट नहीं, बल्कि समझदारी भरी नागरिक तैयारी है।



