ट्रेन के शौचालयों में पानी नहीं मिलने पर रेलवे पर 15 हजार का हर्जाना, उपभोक्ता आयोग ने सुनाया फैसला

शिकायत की अनदेखी से परेशान होकर बीच रास्ते उतर गया 24 सदस्यों का परिवार, टिकट की रकम ब्याज सहित लौटाने और मुकदमे का खर्च देने का भी आदेश
शिवमोग्गा ( शिखर दर्शन ) // ट्रेन के शौचालयों में पानी की व्यवस्था नहीं होना और शिकायत के बाद भी समाधान नहीं मिलना दक्षिण पश्चिम रेलवे को भारी पड़ा है। कर्नाटक के शिवमोग्गा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मामले में रेलवे की सेवा में कमी मानते हुए संबंधित अधिकारियों को यात्री को टिकट की मूल राशि छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने, मानसिक परेशानी के लिए 10 हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में पांच हजार रुपये देने का आदेश दिया है। इस तरह यात्री को कुल 15 हजार रुपये अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा।
मामला यशवंतपुर से शिवमोग्गा के बीच चलने वाली ट्रेन संख्या 66575 का है। शिवमोग्गा के बसवनगुडी स्थित लोक निर्माण विभाग के आवास में रहने वाले नागेंद्र अपने परिवार और रिश्तेदारों के कुल 24 सदस्यों के साथ यात्रा कर रहे थे। समूह ने सामान्य श्रेणी के टिकटों के लिए कुल एक हजार रुपये खर्च किए थे।
यात्रा के दौरान ट्रेन के शौचालयों में पानी उपलब्ध नहीं था। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। ट्रेन जब तुमकुरु स्टेशन पहुंची, तो परिवार ने वहां के स्टेशन मास्टर को समस्या से अवगत कराया। हालांकि, शिकायत के बावजूद कोई प्रभावी समाधान नहीं मिलने का आरोप है। परेशान होकर परिवार को तुमकुरु स्टेशन पर ही यात्रा छोड़नी पड़ी और शिवमोग्गा जाने के लिए दूसरी ट्रेन के टिकट खरीदने पड़े। इस पर उन्हें 1,760 रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा।
विधिक नोटिस के बाद उपभोक्ता आयोग पहुंचा यात्री
रेलवे अधिकारियों के रवैये से असंतुष्ट नागेंद्र ने पहले संबंधित अधिकारियों को विधिक नोटिस भेजा। लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर उन्होंने शिवमोग्गा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
23 अक्टूबर को आयोग के अध्यक्ष टी. शिवन्ना और सदस्य बी.डी. योगानंद भांड्या की पीठ ने मामले की सुनवाई की। आयोग ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर रेलवे की सेवा में कमी मानी और यात्री को राहत देने का आदेश जारी किया।
45 दिनों के भीतर भुगतान करने के निर्देश
आयोग ने दक्षिण पश्चिम रेलवे के बेंगलुरु और तुमकुरु से संबंधित स्टेशन मास्टरों को 45 दिनों के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया है। आदेश के अनुसार, टिकट की मूल राशि एक हजार रुपये 15 अप्रैल 2025 से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटानी होगी।
इसके अलावा, यात्रियों को हुई असुविधा और परेशानी के लिए 10 हजार रुपये तथा मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में पांच हजार रुपये देने होंगे।
यह फैसला यात्रियों की सुविधाओं और शिकायतों के समय पर निवारण की जिम्मेदारी को रेखांकित करता है। रेलवे यात्रा के दौरान बुनियादी सुविधाओं में कमी और शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में उपभोक्ता आयोग से राहत पाने का रास्ता भी उपलब्ध है।



