काले कपड़ों में कलेक्ट्रेट पहुंचे पटवारी, लंबित मांगों पर आर-पार की तैयारी; अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

पदोन्नति, वेतन विसंगति दूर करने और पीवी ऐप के बहिष्कार को लेकर बढ़ा आक्रोश, मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // लंबित मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज राजस्व पटवारियों ने काले कपड़े पहनकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध जताया। छत्तीसगढ़ राजस्व पटवारी संघ ने पदोन्नति, वेतन विसंगति के निराकरण और पीवी ऐप के बहिष्कार सहित विभिन्न मांगों को लेकर शासन के प्रति नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शन के बाद संघ ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए मांगों का शीघ्र निराकरण करने की अपील की। साथ ही मांगें पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी।
काले कपड़े पहनकर जताई नाराजगी
पटवारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित समाधान नहीं मिला है। इसी के विरोध में कर्मचारियों ने काले कपड़े पहनकर कलेक्ट्रेट पहुंचने का निर्णय लिया। प्रदर्शन के माध्यम से उन्होंने शासन का ध्यान लंबित मुद्दों की ओर आकर्षित करते हुए स्पष्ट किया कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की अपेक्षा है।
पदोन्नति और वेतन विसंगति के निराकरण की मांग
राजस्व पटवारी संघ की प्रमुख मांगों में पटवारी से राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति, वेतन विसंगति का निराकरण और पीवी ऐप का बहिष्कार शामिल है। संघ का कहना है कि इन मुद्दों पर लंबे समय से समाधान की प्रतीक्षा की जा रही है। मांगों पर निर्णय नहीं होने से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है और अब आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान मंजू सोनवान, बृजेश सिंह राजपूत और प्रमोद टंडन ने अपनी बात रखी। संघ ने चेतावनी दी कि यदि लंबित मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों के निराकरण के लिए आंदोलन को निर्णायक स्तर तक ले जाने के लिए तैयार हैं।
हड़ताल से राजस्व सेवाएं हो सकती हैं प्रभावित
पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होने पर राजस्व संबंधी कामकाज प्रभावित होने की आशंका है। भूमि से जुड़े कार्यों और पटवारी स्तर पर पूरी होने वाली प्रक्रियाओं के लिए आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। अब निगाहें शासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह कर्मचारियों की मांगों पर क्या निर्णय लेता है और प्रस्तावित हड़ताल को टालने के लिए कोई पहल करता है या नहीं।



