समान नागरिक संहिता पर बिलासपुर में दो टूक पक्ष, मुस्लिम पर्सनल लॉ की सुरक्षा को लेकर उठीं आपत्तियां

आठ जिलों के प्रतिनिधियों ने विवाह, तलाक, भरण-पोषण और उत्तराधिकार पर रखे विचार; समिति ने महिलाओं-बच्चों के अधिकार मजबूत करने की बात कही, 30 अक्टूबर तक सुझाव आमंत्रित
बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया के बीच बिलासपुर में आयोजित संभाग स्तरीय परामर्श बैठक में अलग-अलग सामाजिक और धार्मिक पक्ष सामने आए। आठ जिलों के प्रतिनिधियों ने विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन संबंधों जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। वहीं, बिलासपुर के तालापारा स्थित ताज मस्जिद की मस्जिद एवं मदरसा कमेटी ने मुस्लिम पर्सनल लॉ और धार्मिक स्वतंत्रता की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए प्रस्तावित संहिता के स्वरूप पर आपत्ति दर्ज कराई।
एक ओर समान नागरिक संहिता उच्च स्तरीय समिति के सदस्य शत्रुघ्न सिंह ने इसे महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को मजबूत करने तथा पारिवारिक मामलों में समानता बढ़ाने की दिशा में प्रस्तावित पहल बताया। उन्होंने कहा कि संहिता के तहत किसी धर्म की पूजा-पद्धति, धार्मिक आस्था और रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। दूसरी ओर, मस्जिद कमेटी ने आशंका जताई कि यदि मुस्लिम समुदाय के विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक व्यवस्था से जुड़े व्यक्तिगत कानूनों को समाप्त या निष्प्रभावी किया गया, तो इसका समुदाय पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
आठ जिलों के प्रतिनिधियों ने रखे अपने विचार
28 अक्टूबर को लाल बहादुर शास्त्री स्कूल परिसर स्थित देवकी नंदन दीक्षित सभागृह में आयोजित बैठक में बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों के पदाधिकारियों, शिक्षाविदों तथा विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने प्रस्तावित संहिता के पक्ष और विपक्ष में अपने सुझाव रखे।
चर्चा के दौरान पारंपरिक सामाजिक मान्यताओं, विभिन्न समुदायों की प्रथाओं और कानूनी सुधारों से जुड़े पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ। बैठक में राज्य शासन की ओर से गठित समान नागरिक संहिता उच्च स्तरीय समिति के सदस्य एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह और एमके राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार, सेवानिवृत्त प्राचार्य ज्योति रानी सिंह, समिति के सचिव एवं रायपुर संभागायुक्त श्याम धावड़े तथा बिलासपुर संभागायुक्त सुनील जैन उपस्थित रहे।
समिति ने महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को बताया प्रमुख उद्देश्य
समिति के सदस्य शत्रुघ्न सिंह ने समान नागरिक संहिता की पृष्ठभूमि और आवश्यकता पर बात करते हुए कहा कि पारिवारिक मामलों से संबंधित विभिन्न कानूनों और प्रावधानों में कई तरह की भिन्नताएं हैं। प्रस्तावित संहिता के माध्यम से विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे विषयों में समानता को बढ़ावा देने तथा महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को अधिक मजबूत बनाने पर विचार किया जा रहा है।
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 44 का उल्लेख करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता का विचार संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित व्यवस्था का संबंध नागरिक और पारिवारिक मामलों से होगा तथा किसी धर्म की पूजा-पद्धति, आस्था और रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
समिति के अनुसार, विभिन्न वर्गों से प्राप्त सुझावों, मौजूदा कानूनों और अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के बाद प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसके बाद संहिता से संबंधित अनुशंसाएं राज्य शासन के समक्ष प्रस्तुत की जाएंगी।
ताज मस्जिद कमेटी ने मुस्लिम पर्सनल लॉ की सुरक्षा का मुद्दा उठाया
बैठक की प्रक्रिया के बीच बिलासपुर के तालापारा स्थित ताज मस्जिद की मस्जिद एवं मदरसा कमेटी ने प्रस्तावित समान नागरिक संहिता को लेकर अपना पक्ष प्रस्तुत किया। कमेटी के सदर वहीदउल्ला खान और सचिव हाजी शेख अजीमुद्दीन के नाम से दिए गए ज्ञापन में मुस्लिम पर्सनल लॉ और धार्मिक स्वतंत्रता की सुरक्षा को लेकर संवैधानिक एवं विधिक चिंताएं व्यक्त की गई हैं।
ज्ञापन में कहा गया है कि मुस्लिम समाज महिलाओं के सम्मान, बच्चों के अधिकार, न्याय, समानता और संविधानसम्मत सामाजिक सुधारों के विरोध में नहीं है। हालांकि, कमेटी ने सामाजिक सुधारों और किसी समुदाय के मान्य व्यक्तिगत कानूनों को समाप्त करने के बीच अंतर किए जाने की आवश्यकता जताई है।
कमेटी की आशंका है कि यदि प्रस्तावित संहिता के तहत मुस्लिम समुदाय के विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक व्यवस्था से जुड़े व्यक्तिगत कानूनों को पूरी तरह समाप्त या निष्प्रभावी कर दिया गया, तो इसका समुदाय पर विशेष प्रभाव पड़ेगा। इसी आधार पर कमेटी ने संहिता के संभावित स्वरूप पर आपत्ति दर्ज कराते हुए धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत कानूनों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है।
प्रारूप तैयार करने से पहले होगा कानूनी व्यवस्थाओं का अध्ययन
बैठक में बताया गया कि समिति छत्तीसगढ़ में लागू मौजूदा कानूनी प्रावधानों के साथ अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का भी अध्ययन कर रही है। नागरिकों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों से मिलने वाले सुझावों के आधार पर प्रारूप तैयार कर राज्य शासन को सौंपा जाएगा। इसके साथ आवश्यक विधायी और प्रशासनिक अनुशंसाएं भी प्रस्तुत की जाएंगी।
कार्यक्रम में प्रस्तुतीकरण के माध्यम से समान नागरिक संहिता की अवधारणा और इससे जुड़े प्रमुख विषयों की जानकारी दी गई। समिति के सदस्य एमके राउत, श्याम धावड़े, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह ने भी अपने विचार रखे। स्वागत उद्बोधन बिलासपुर संभागायुक्त सुनील जैन ने दिया। कार्यक्रम का संचालन सौरभ सक्सेना ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन अपर जिला दंडाधिकारी शिवकुमार बनर्जी ने किया।
इस अवसर पर अपर कलेक्टर वीरेंद्र बहादुर पचभाई, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप अग्रवाल तथा उपायुक्त स्मृति तिवारी और हरिशंकर चौहान सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
30 अक्टूबर तक ऑनलाइन सुझाव दे सकेंगे नागरिक
प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के प्रारूप को लेकर आम नागरिकों और संगठनों से 30 अक्टूबर तक सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। इसके लिए राज्य शासन की ओर से ucc.cgstate.gov.in वेबसाइट और ucc-chhattisgarh@cg.gov.in ई-मेल उपलब्ध कराया गया है।
परामर्श बैठक में सामने आए विचार बताते हैं कि प्रस्तावित संहिता को लेकर महिलाओं और बच्चों के अधिकारों, पारिवारिक कानूनों में समानता तथा धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत कानूनों की सुरक्षा जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं। अब विभिन्न पक्षों से मिलने वाले सुझावों और कानूनी अध्ययन के आधार पर तैयार होने वाले प्रारूप पर आगे की प्रक्रिया निर्भर करेगी।



