मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश के 3 लाख शिक्षकों को मिल सकती है बड़ी राहत, पहली नियुक्ति से वरिष्ठता देने पर मंथन

1998 से 2013 तक नियुक्त शिक्षाकर्मियों, गुरुजियों और संविदा शिक्षकों को मिल सकता है लाभ; ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण में भी बढ़ोतरी की उम्मीद

मध्य प्रदेश में करीब तीन लाख शिक्षकों को उनकी पहली नियुक्ति की तारीख से वरिष्ठता देने के प्रस्ताव पर विचार किए जाने की खबर है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर इस संबंध में मंथन चल रहा है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो वर्ष 1998 से 2013 के बीच शिक्षाकर्मी, गुरुजी और संविदा शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए कर्मचारियों को लाभ मिल सकता है। इससे सरकार पर लगभग 600 से 700 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ने का अनुमान जताया गया है।

भोपाल ( शिखर दर्शन ) //

2018 में संविलियन के बाद खत्म हो गई थी पुरानी वरिष्ठता

मध्य प्रदेश में अलग-अलग वर्षों में शिक्षाकर्मी, गुरुजी और संविदा शिक्षक के रूप में नियुक्तियां हुई थीं। वर्ष 1998 और 1999 में शिक्षाकर्मियों की भर्ती हुई, जबकि संविदा शिक्षकों की नियुक्तियां वर्ष 2001, 2003, 2005, 2009 और 2013 में की गई थीं।

वर्ष 2018 में इन शिक्षकों का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया। इसके बाद विभागीय सेवा में वरिष्ठता की गणना संविलियन की तारीख से की जाने लगी। इससे उनकी पूर्व नियुक्ति से जुड़ी सेवा अवधि को वरिष्ठता में शामिल नहीं किया गया। अब पहली नियुक्ति की तारीख से वरिष्ठता निर्धारित करने की संभावना पर विचार किए जाने की बात सामने आई है।

वरिष्ठता मिलने पर क्या-क्या हो सकता है लाभ ?

यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो संबंधित शिक्षकों को कई तरह के लाभ मिलने की संभावना है।

  • वरिष्ठता का लाभ: पहली नियुक्ति से सेवा अवधि की गणना होने पर वरिष्ठता सूची में स्थान बदल सकता है।
  • क्रमोन्नति और पदोन्नति: सेवा रिकॉर्ड में पुरानी नियुक्ति अवधि जुड़ने से नियमानुसार क्रमोन्नति और उच्च पदों पर पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
  • ग्रेच्युटी में बढ़ोतरी: सेवा अवधि की पुनर्गणना से सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली ग्रेच्युटी की राशि बढ़ सकती है।
  • अर्जित अवकाश का लाभ: पुरानी सेवा अवधि जुड़ने से पात्रता और लागू नियमों के अनुसार अर्जित अवकाश तथा उसके नकदीकरण की राशि में बढ़ोतरी हो सकती है।
  • आर्थिक लाभ: उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ शिक्षकों को ग्रेच्युटी में लगभग दो लाख से 15 लाख रुपये तक अतिरिक्त लाभ मिलने का अनुमान जताया गया है। वास्तविक राशि संबंधित शिक्षक की सेवा अवधि और लागू नियमों पर निर्भर करेगी।

सरकार पर बढ़ सकता है 600 से 700 करोड़ रुपये का भार

प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में राज्य सरकार पर लगभग 600 से 700 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ने का अनुमान है। हालांकि, वरिष्ठता निर्धारण की प्रक्रिया, पात्र शिक्षकों की अंतिम संख्या और आर्थिक लाभों की गणना को लेकर आधिकारिक निर्णय सामने आना बाकी है।

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