सीजेपी प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 20 से ज्यादा एफआईआर दर्ज; तीन प्रमुख नेता रिहा

अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर मिली रिहाई, ध्रुव राठी भी हिरासत से छोड़े गए
नई दिल्ली ( शिखर दर्शन ) //
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के बाद दिल्ली में पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के सिलसिले में दिल्ली पुलिस ने 20 से अधिक एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ये मामले कथित तौर पर कानून हाथ में लेने, सरकारी काम में बाधा डालने और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट से संबंधित हैं। इस बीच, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके सहित तीन प्रमुख नेताओं को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत से रिहाई मिल गई है।
तीन सीजेपी नेताओं को एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और नेताओं आशुतोष रांका तथा सौरव दास को दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को हिरासत में लिया था। तीनों को दिल्ली कैंट स्थित विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। पुलिस के अनुसार, उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 170 के तहत एहतियातन हिरासत में लिया गया था।
11 अक्टूबर को अदालत ने तीनों को एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छा व्यवहार करने की शर्त पर रिहा कर दिया। इसके लिए उन्होंने 50 हजार रुपये का जमानती मुचलका भरा। करीब 23 से 24 घंटे हिरासत में रहने के बाद उनकी रिहाई हुई।
सुप्रीम कोर्ट में चार याचिकाओं पर सुनवाई
सीजेपी प्रदर्शन से जुड़ी चार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाओं में राजनीतिक नेताओं और वकीलों की हिरासत, पुलिस की कार्रवाई, मेट्रो स्टेशनों और सड़कों पर प्रतिबंध तथा फोन जैमर के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
सुनवाई के दौरान वकीलों ने आरोप लगाया कि 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने वकीलों के साथ मारपीट की। अदालत में वकीलों और पुलिस अधिकारियों के बीच बहस भी हुई। कुछ वकीलों ने पुलिसकर्मियों के बैठने की व्यवस्था पर आपत्ति जताई।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में परेशानी के बाद बदला गया कोर्टरूम
सुनवाई के दौरान कोर्टरूम नंबर 18 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का लिंक काम नहीं करने की बात सामने आई। वकीलों ने अदालत से कोर्टरूम बदलने की मांग की, क्योंकि वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होना था। इसके बाद सुनवाई कोर्टरूम नंबर 5 में स्थानांतरित कर दी गई। कोर्टरूम बदलने के दौरान सुप्रीम कोर्ट के गलियारों में भीड़ जुट गई।
ध्रुव राठी को भी हिरासत से छोड़ा गया
यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिया गया था। उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें देर रात रिहा कर दिया गया। पुलिस ने प्रदर्शन को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि जंतर-मंतर पर प्रतिबंधों का उल्लंघन कर प्रदर्शन करने की कोशिश पर कार्रवाई की जा सकती है।
ध्रुव राठी इससे पहले बेंगलुरु में हुए सीजेपी प्रदर्शन में शामिल हुए थे। दिल्ली में हुई कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारियों की हिरासत, सार्वजनिक आवाजाही पर पाबंदियों और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को लेकर विवाद तेज हो गया है।



