बिलासपुर संभाग

विनायका हाइट्स में करोड़ों के फ्लैट सौदे पर धोखाधड़ी का आरोप, खरीदार की सहमति बिना बिल्डर के खाते में पहुंची लोन राशि

बिल्डर और बैंक अधिकारियों पर एफआईआर, फर्जी दस्तावेज व आपराधिक षड्यंत्र के आरोप; पुलिस ने शुरू की जांच

बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // शहर की चर्चित आवासीय परियोजना विनायका हाइट्स एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गई है। इस बार एक फ्लैट खरीदार ने बिल्डर और सेंट बैंक होम फाइनेंस के अधिकारियों पर उसकी जानकारी और सहमति के बिना लाखों रुपये की होम लोन राशि सीधे बिल्डर के खाते में स्थानांतरित करने, फर्जी दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी करने तथा आपराधिक षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) एवं 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

30 लाख का फ्लैट, 23 लाख का लोन और फिर शुरू हुआ विवाद

पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता चन्द्रिका प्रसाद कुशवाहा ने वर्ष 2016 में विनायका हाइट्स की तीसरी मंजिल पर स्थित फ्लैट क्रमांक-402 लगभग 30 लाख रुपये में खरीदने का अनुबंध किया था। आरोप है कि परियोजना के प्रमोटर राजेश सेठ ने सेंट बैंक होम फाइनेंस से अपने अच्छे संबंधों का हवाला देकर होम लोन स्वीकृत कराने की प्रक्रिया शुरू कराई। इसके बाद बैंक अधिकारियों ने आवश्यक दस्तावेज लेकर करीब 23 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कर दिया।

रजिस्ट्री खरीदार के नाम, भुगतान सीधे बिल्डर को

शिकायत के अनुसार 18 फरवरी 2017 को फ्लैट की रजिस्ट्री शिकायतकर्ता और उनकी पत्नी के नाम पर कराई गई, लेकिन उनकी अनुमति लिए बिना ऋण की पूरी राशि सीधे राजेश सेठ और रजनी सेठ के खातों में स्थानांतरित कर दी गई। आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने निर्माण की वास्तविक प्रगति का सत्यापन किए बिना चरणबद्ध भुगतान कर दिया, जबकि फ्लैट का निर्माण अधूरा था।

बंधक संपत्ति होने की जानकारी बाद में मिली

शिकायतकर्ता का कहना है कि वर्ष 2019 में बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा परियोजना की संपत्ति पर कब्जे संबंधी नोटिस चस्पा किए जाने और समाचार पत्र में प्रकाशन के बाद उन्हें पता चला कि संबंधित भूमि और भवन पहले से ही बैंक ऑफ बड़ौदा के पास बंधक था। इसके बावजूद उसी संपत्ति पर होम लोन स्वीकृत कर राशि जारी किए जाने से बैंक अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है।

फर्जी दस्तावेज और नक्शे में फेरबदल का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बिल्डर और बैंक अधिकारियों ने कथित रूप से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर भवन के स्वीकृत नक्शे में फेरबदल किया तथा बंधक संपत्ति को भारमुक्त दर्शाकर रजिस्ट्री कराई। शिकायतकर्ता ने तत्कालीन बैंक अधिकारियों शशि भूषण कर्ण, अपर्णा विश्वास, नितिन निगम, जॉली बी. फिलिप्स सहित अन्य कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

धमकाने का भी आरोप

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि वर्ष 2026 में बैंक के कुछ कर्मचारी उनके घर पहुंचे और कथित रूप से अभद्र व्यवहार करते हुए उन्हें धमकाया। इस संबंध में भी पुलिस से कार्रवाई की मांग की गई है।

पहले भी विवादों में रहा है सेंट बैंक होम फाइनेंस

सेंट बैंक होम फाइनेंस का नाम इससे पहले भी विवादों में सामने आ चुका है। हाल ही में तोरवा थाना में शाखा प्रबंधक अपर्णा विश्वास और सहायक कर्मचारी नितिन निगम के विरुद्ध धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी, जिसकी जांच अभी जारी है।

विनायका हाइट्स पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल

विनायका हाइट्स परियोजना लंबे समय से विभिन्न विवादों के कारण चर्चा में रही है। स्थानीय रहवासियों ने भवन का निर्माण स्वीकृत नक्शे के विपरीत किए जाने, आवासीय परिसर में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने तथा घरेलू बिजली कनेक्शन का व्यावसायिक उपयोग किए जाने जैसे आरोप लगाए हैं। इन मामलों में बिजली विभाग की विजिलेंस टीम द्वारा कार्रवाई किए जाने की जानकारी भी सामने आ चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम को कई शिकायतें देने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।

फिलहाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर अपराध दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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