रायपुर संभाग

बस्तर में अब सुरक्षा कैंप नहीं, बनेंगे ‘सेवाडेरा’: रोजगार और विकास का नया मॉडल तैयार, कांग्रेस पर भी बरसे CM साय

अमित शाह की मौजूदगी में हुई मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक को बताया “सार्थक”

रायपुर ( शिखर दर्शन ) // Vishnu Deo Sai ने बस्तर में आयोजित 26वीं मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक के बाद बड़ा बयान देते हुए कहा कि अब बस्तर के सुरक्षा कैंपों को “सेवाडेरा” के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और विकास के नए अवसर मिलेंगे।

केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री शाम को रायपुर लौटे। स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने बैठक को बेहद महत्वपूर्ण और सार्थक बताया।


“टीम भावना से होगा विकास”

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में चार राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए और बैठक का मुख्य उद्देश्य केंद्र एवं राज्यों के समन्वय से विकास कार्यों को गति देना था।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जाएगा और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब सुरक्षा के साथ-साथ विकास और रोजगार पर भी विशेष फोकस किया जाएगा।


“केंद्र पहले से चाहता था नक्सलवाद का अंत”

मुख्यमंत्री ने इस दौरान कांग्रेस और पूर्ववर्ती Bhupesh Baghel सरकार पर भी निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लंबे समय से नक्सलवाद खत्म करना चाहती थी, लेकिन पूर्व की कांग्रेस सरकार ने इस दिशा में अपेक्षित सहयोग नहीं किया।

साय ने कहा कि अब केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बस्तर में शांति, सुरक्षा और विकास का नया वातावरण तैयार कर रही हैं।


क्या है “सेवाडेरा” मॉडल?

मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर क्षेत्र में स्थापित करीब 200 सुरक्षा कैंपों में से शुरुआती चरण में 70 कैंपों को “सेवाडेरा” के रूप में विकसित किया जाएगा। इसकी शुरुआत आज एक कैंप से कर दी गई है।


सेवाडेरा से स्थानीय लोगों को क्या फायदा मिलेगा?

मुख्यमंत्री के अनुसार “सेवाडेरा” मॉडल के जरिए:

  • स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा
  • छोटे व्यापार और स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा
  • गांवों में बुनियादी सुविधाएं विकसित होंगी
  • सुरक्षा कैंप विकास और जनसेवा केंद्र के रूप में काम करेंगे
  • स्थानीय लोगों और सुरक्षा बलों के बीच विश्वास बढ़ेगा

सरकार का मानना है कि इस पहल से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की रफ्तार तेज होगी और लोगों का जीवन स्तर बेहतर होगा।

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