बिलासपुर संभाग

शादीशुदा शख्स पर रेप का आरोप नहीं चलेगा! छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का सख्त संदेश

“सच्चाई जानते हुए बने संबंध तो धोखाधड़ी नहीं” — महिला की अपील खारिज

बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम और स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि यदि किसी महिला को पहले से यह जानकारी हो कि संबंधित पुरुष विवाहित है और इसके बावजूद वह उसके साथ संबंध बनाती है, तो बाद में उस पर शादी का झांसा देकर रेप या धोखाधड़ी का आरोप नहीं लगाया जा सकता। जस्टिस संजय एस अग्रवाल की एकल पीठ ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए आरोपी को बरी रखने का आदेश दिया और महिला की अपील खारिज कर दी।

मामले में डोंगरगढ़ निवासी महिला ने दावा किया था कि उसकी शादी 8 मई 2008 को महेश गंजीर से हुई थी और दोनों पति-पत्नी की तरह साथ रह रहे थे। महिला का कहना था कि इस दौरान उनके बीच शारीरिक संबंध बने और उसने अलग-अलग मौकों पर खर्च भी किया, लेकिन बाद में आरोपी ने उसे घर से निकाल दिया, जिसके बाद उसने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि महिला के बयानों में कई विरोधाभास हैं। शुरुआती शिकायतों में शादी की स्पष्ट तारीख का उल्लेख नहीं था और एक अन्य नोटिस से यह भी सामने आया कि महिला को पहले से ही आरोपी के शादीशुदा होने और उसकी पहली पत्नी के बारे में जानकारी थी।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 493 के तहत धोखाधड़ी तभी मानी जाती है, जब पुरुष महिला को यह विश्वास दिलाए कि वह उसकी वैध पत्नी है। जब दोनों पक्षों को यह पता हो कि उनका संबंध कानूनी रूप से वैध नहीं है, तो ऐसे में धोखाधड़ी या झांसा देने का मामला नहीं बनता।

अदालत ने यह भी कहा कि पहली पत्नी के जीवित रहते ऐसा कथित विवाह हिंदू विवाह अधिनियम की धाराओं के तहत स्वतः शून्य माना जाएगा। इसी आधार पर कोर्ट ने आरोपी के पक्ष में फैसला बरकरार रखते हुए महिला की अपील को निरस्त कर दिया।

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