18 अप्रैल महाकाल आरती: मस्तक पर रजत त्रिशूल और त्रिपुंड अर्पित कर दिव्य श्रृंगार, यहां कीजिए भगवान महाकालेश्वर के दर्शन

भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब, जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर
उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि शनिवार तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए, जहां परंपरा अनुसार भस्म आरती विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। मंदिर के पट खुलते ही पुजारियों द्वारा गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन किया गया और भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक कर भगवान का दिव्य श्रृंगार किया गया, जिसमें भांग, चंदन और आभूषणों का विशेष उपयोग किया गया।
भस्म अर्पण से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म रमाई गई। इसके उपरांत भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्पमालाएं अर्पित कर भव्य अलंकरण किया गया, जिससे गर्भगृह दिव्य सुगंध और आस्था से सराबोर हो उठा।
सुबह आयोजित भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं कही और बाबा महाकाल की जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बन गया।



