मध्यप्रदेश

नव संवत्सर पर महाकाल मंदिर में विशेष अभिषेक: नीम जल से की गई पूजा, स्वस्थ जीवन की कामना के साथ लहराया ब्रह्मध्वज

उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // गुड़ी पड़वा और नव संवत्सर के पावन अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार को श्रद्धा, आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। “ॐ श्री महाकालेश्वराय नमः” के जयघोष के बीच भगवान महाकाल का विशेष पूजन-अभिषेक किया गया, जिससे पूरे मंदिर परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।

नववर्ष के शुभारंभ पर परंपरानुसार भगवान महाकाल का नीम मिश्रित जल से अभिषेक किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार नीम को औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है, इसलिए इस अभिषेक के माध्यम से समस्त भक्तों के स्वस्थ, निरोग और समृद्ध जीवन की कामना की जाती है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सकारात्मकता का भी संदेश देती है।

मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। विशेष पूजा-अर्चना के साथ भक्तों ने नए वर्ष के लिए सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। इस दौरान चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (गुड़ी पड़वा) पर मंदिर के शिखर पर ध्वज पूजन के पश्चात ब्रह्मध्वज का भव्य ध्वजारोहण भी किया गया, जिसने आयोजन को और भी गौरवपूर्ण बना दिया।

बताया जाता है कि यह ध्वज परंपरा सम्राट विक्रमादित्य के काल से जुड़ी करीब 2000 वर्ष पुरानी विरासत है। इस गौरवशाली परंपरा को पुनर्जीवित करने की पहल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में की गई है, जिसके तहत विक्रम संवत और ध्वज परंपरा को व्यापक स्वरूप दिया जा रहा है।

इस तरह बाबा महाकाल के दरबार में नव संवत्सर की शुरुआत भक्ति, परंपरा और सांस्कृतिक वैभव के साथ हुई, जहां हर श्रद्धालु ने नए वर्ष के लिए मंगलकामनाएं कीं।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Don`t copy text!