22 नवंबर महाकाल भस्म आरती: बाबा महाकाल के मस्तक पर अर्पित हुआ त्रिशूल, ड्रायफ्रूट से हुआ दिव्य श्रृंगार – यहां देखिए भस्म आरती की झलक

उज्जैन (शिखर दर्शन) // मंदिर जय जय श्री महाकाल, हर हर महादेव, हर हर शंभू और ॐ नमः शिवाय के उद्घोष से गूंज रहा था। मार्गशीर्ष माह शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि शनिवार की अलसुबह 4 बजे विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के कपाट विधि-विधान के साथ खोले गए। इसके बाद विशेष भस्म आरती अत्यंत भव्य और दिव्य श्रृंगार के साथ संपन्न हुई।
कपाट खुलते ही सबसे पहले पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का पूजन-अर्चन किया। भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत द्वारा अभिषेक किया गया। इसके बाद विशेष सुगंधित चंदन, पुष्प और भोग सामग्री अर्पित की गई।
भस्म अर्पण के पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल चढ़ाया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान कर कपूर आरती की गई। इसके बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से आच्छादित कर भस्म रमाई गई। पूजा पूर्ण होने पर शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्पमालाएं अर्पित कर महाकाल का अलौकिक श्रृंगार किया गया। दिव्य आभूषणों और सुगंधित पुष्पों से भगवान का अलंकरण अत्यंत मनोहारी दिखाई दे रहा था।
सुबह की इस पावन आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं कही और आशीर्वाद प्राप्त किया। आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर ‘जय महाकाल’ के जयकारों से गुंजायमान था, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्ति रस में डूब गया।



