छत्तीसगढ़

श्रीमद् भागवत महापुराण महायज्ञ संपन्न , प्रसिद्ध कथावाचक पंडित अरुण दुबे की प्रस्तुति… “मंगवानी परिवार का आयोजन” !

चकरभाठा // बिलासपुर//(शिखर दर्शन)//नगर के जाने-माने व्यापारी थद्धा राम मंगवानी वा उनके परिवार द्वारा “श्रीमद् भागवत महापुराण भक्ति ज्ञान महायज्ञ” का आयोजन सिंधी धर्मशाला चकरभाठा कैंप में आयोजित किया गया ।

                    18 दिसंबर से चल रहे श्रीमद् भागवत कथा में वक्ता एवं महान कथा वाचक परम पूज्य पंडित श्री अरुण दुबे जी के श्रीमुख से ईश्वरीय भक्ति अमृत कथा की बयार बह रही है।

                  चकरभाठा नगर की धरती में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह के दौरान “श्रीमद भागवत गीता की जयंती” के अवसर पर पवित्र ग्रंथ भागवत गीता की व्याख्या सहित उद्बोधन करते हुए…. महान कथा वाचक एवं व्यास पीठाधीश्वर परम पूज्य पंडित अरुण दुबे के श्रीमुख से परमात्मा का गुणगान संगीतमय वातावरण के साथ भक्ति भाव व भजन के आनंदमई वातावरण को सुनने के लिए श्रोताओं की भीड़ उमड़ पड़ी । व्यास पीठ की आसंदी से श्री पंडित दुबे ने कहा कि श्रीमद् भागवत महापुराण ग्रंथ को सिर्फ एक पुस्तक ही नहीं समझना चाहिए , बल्कि यह परमात्मा से साक्षात परिचित होने का माध्यम है । यह राजा रानी की कहानी नहीं है ,यह तो संतो और ऋषि मुनियों ने इन कथाओं के माध्यम से बताया की व्यक्ति और समाज को कैसे सुख आनंद और समृद्धि के साथ जीना है। उन्होंने कहा किया भागवत गीता का पवित्र ग्रंथ हमें एक आचरण व व्यवहार संहिता के रूप में प्रदान किया गया है । भागवत पुराण की कथाएं हमें जीवन में सच्चे मार्ग दिखाती है । और मनुष्य को परिवार एवम राष्ट्र की उन्नति के लिए आत्मबल प्रदान करती है । भागवत गीता से हमें यह भी पता चलता है कि पुरखों के जीवन में उनसे क्या गलतियां हुई है ? जिससे उन्हे उसका फल भोगना पड़ा । और किन अच्छाइयों के कारण उन्हें पौराणिक कथाओं में स्थान मिला ? पंडित अरुण दुबे ने व्यास पीठ से श्रोताओं को संबोधित करते हुए मनुष्य जीवन में पुनर्जन्म का महत्व भी बताया । कि कैसे व्यक्ति को वर्तमान जीवन काल में अपने पिछले जन्मों के कर्मों को भोगना पड़ता है ? तथा कैसे हम अपना अगले जन्म को सुरक्षित कर सकते हैं ? कैसे मनुष्य का प्रारब्ध निश्चित होता है ? जिसे कोई नहीं टाल सकता , अगर कोई टाल सकता है या उसका कुछ प्रभाव कम कर सकता है तो सिर्फ और सिर्फ श्रीमद भागवत पुराण महायज्ञ । पंडित अरुण दुबे ने आगे श्रीमद् भागवत कथा की महिमा व उसका महत्व वर्णन करते हुए बताया कि कैसे आज का मनुष्य अपने जीवन शैली में आचरण , संस्कार इत्यादि को पौराणिक ग्रंथों के अनुकूल नहीं चलकर अपना जीवन किस तरह बर्बाद कर रहा है ? जिससे समाज पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है । उन्होंने कहा कि गीता का अनुसरण कर के व्यक्ति वा समाज को नैतिकता के धरातल में श्रेष्ठ साबित किया जा सकता है । और यह राष्ट्र में शांति और समृद्धि के साथ सशक्त राष्ट्र निर्माण करने का अद्भुत साधन है। अंत में श्री पीठाधीश्वर ने कहा की …संसार की सभी समस्याओं का समाधान श्रीमद् भागवत गीता में समाहित है । श्रीमद् भागवत गीता के अनुसार श्री कृष्णा राष्ट्र नायक के रूप में भी माने जाते हैं ।

श्री मंगवानी परिवार द्वारा आयोजित एवं उनके पुत्र वधू संगीता विनोद द्वारा संकल्पित व श्रद्धा भाव से आयोजित जनकल्याणार्थ हेतु श्रीमद् भागवत कथा को सुनने के लिए पूरे छत्तीसगढ़ राज्य से मंगवानी परिवार के सगे संबंधियों , इष्ट मित्रों सहित प्रशासनिक अधिकारियों एवं बुद्धिजीवी सज्जनों की उपस्थिति निरंतर और प्रतिदिन बनी रही । मंगवानी परिवार की ओर से श्रीकृष्ण जन्मउत्सव तथा रुक्मणी विवाह के प्रसंग पर अद्भुत और अद्वितीय झांकियो का प्रदर्शन भी किया गया। मंगवानी परिवार ने यथाशक्ति यथा योग्य भक्तों का सम्मान किया कथा के प्रारंभ के दिन से ही श्रीमद् भागवत गीता की प्रतियां , शाल , श्रीफल आदि से आए हुए श्रद्धालुओं का सम्मान किया गया ।

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