रायपुर संभाग

परीक्षा के दौरान शिक्षकों की ट्रेनिंग पर विवाद: समग्र शिक्षा विभाग पर बंदरबांट के आरोप, शिक्षाविदों ने पूछा— पहले प्रशिक्षण क्यों नहीं दिया ?

परीक्षा के बीच शिक्षकों की ट्रेनिंग पर विवाद: समग्र शिक्षा विभाग पर बंदरबांट के आरोप

विशेषज्ञ बोले— बच्चों की पढ़ाई बाधित, वित्तीय वर्ष समाप्ति से पहले फंड खपत का मामला

रायपुर (शिखर दर्शन) // समग्र शिक्षा विभाग में व्यावसायिक शिक्षा के नाम पर अनियमितताओं के आरोप लगातार बढ़ रहे हैं। कभी ठेका कंपनियों को अतिरिक्त भुगतान किया जाता है, तो कभी अधिकारियों पर बच्चों के नाम पर फंड की हेराफेरी करने के आरोप लगते हैं। ताजा विवाद परीक्षा के दौरान शिक्षकों के स्किल ट्रेनिंग कार्यक्रम को लेकर सामने आया है। शिक्षकों और शिक्षाविदों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि यह प्रशिक्षण केवल वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले फंड खर्च करने के लिए जल्दबाजी में आयोजित किया गया है।

शिक्षकों में रोष: परीक्षा के दौरान ट्रेनिंग क्यों?

शिक्षकों का कहना है कि परीक्षा के समय उन्हें प्रशिक्षण के लिए बुलाना न सिर्फ अनुचित है, बल्कि छात्रों के हितों के खिलाफ भी है। एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा,
“बच्चों को परीक्षा के लिए तैयार करें या खुद प्रशिक्षण में जाएं? ट्रेनिंग जरूरी है, लेकिन इसका समय पूरी तरह गलत है। गर्मी की छुट्टियों में भी इसे आयोजित किया जा सकता था। इससे न शिक्षकों को लाभ मिलेगा, न विद्यार्थियों को।”

शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों और समन्वयकों का इतना दबदबा है कि वे खुलकर विरोध तक नहीं कर सकते। उन्हें डर है कि विरोध करने पर नौकरी पर खतरा आ सकता है।

शिक्षाविदों का सवाल— जब ट्रेनिंग जरूरी थी, तो पहले क्यों नहीं?

शिक्षाविदों ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सरकार को शिक्षकों के प्रशिक्षण की इतनी चिंता थी, तो इसे सत्र की शुरुआत में या मध्य में आयोजित किया जाना चाहिए था।
“परीक्षा के समय आयोजित यह प्रशिक्षण छात्रों की पढ़ाई बाधित करेगा और सरकारी फंड का दुरुपयोग दिखता है। अगर विभाग को सही प्रशिक्षण देना था, तो इसे व्यवस्थित रूप से पहले ही आयोजित किया जाता।”

जब समग्र शिक्षा भवन में सुविधा थी, तो बाहर आयोजन क्यों?

शिक्षकों ने यह भी सवाल उठाया कि जब रायपुर स्थित समग्र शिक्षा भवन में 4-5 कार्यशाला हॉल, बड़े टीवी, प्रोजेक्टर, साउंड सिस्टम और अन्य तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध हैं, तो 40-50 किलोमीटर दूर जाकर ट्रेनिंग कराने की क्या जरूरत थी?

विभाग की सफाई— चुनावी व्यस्तताओं के कारण देर हुई

इस मामले पर समग्र शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक के. कुमार ने सफाई देते हुए कहा,
“व्यावसायिक शिक्षकों के लिए आठ ट्रेड में पाँच दिनों का प्रशिक्षण निर्धारित किया गया है। यह 7 मार्च से 11 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें 1,200 से अधिक शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रशिक्षण केंद्र दूर रखने का कारण स्थान की उपलब्धता की कमी और चुनावी व्यस्तताओं के चलते पहले आयोजन न हो पाना है।”

हालांकि, शिक्षकों और विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल बहानेबाजी है और असली मकसद वित्तीय वर्ष के अंत में बचा हुआ फंड खर्च करना है। अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है।

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