02 अगस्त श्री महाकाल भस्म आरती श्रृंगार दर्शन:

( विशेष संवाददाता छमु गुरु की रिपोर्ट : )
सावन के विशेष अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर में भव्य भस्म आरती उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन शुक्रवार रात ढाई बजे मंदिर के कपाट खोले गए । सावन के इस पावन महीने में भगवान श्री महाकाल की आरती का समय विशेष रूप से 3 बजे निर्धारित किया गया , जिससे की भक्तों को भगवान महाकाल की पूजा का अनूठा अनुभव मिल सके ।
आरती से सबसे पहले भगवान महाकाल को पवित्र गंगा जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक पूजन किया गया। सिद्धांत के अनुसार, श्रावण माह में शिव आराधना से सभी कष्टों की मुक्ति होती है।

अभिषेक के बाद, भगवान महाकाल को तिलक, त्रिपुंड और कलात्मक आभूषण निक्कर कर, पुष्प पुष्प से राजा स्वरूप में धारण किया गया। इसके बाद, बाबा को सारांशित किया गया। श्री महाकाल ने शेष नाग का मुकुट, चांदी मुंडो की माला और रुद्राक्ष की माला के साथ फूलों की माला धारण की, श्री चंद्रमौली को विभिन्न प्रकार के फूलों के साथ अवंतिका नगरी की प्रसिद्ध मिठाइयों का भोग लगाया।
भस्मीभूत तथा पूर्ण श्रृंगार के बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ श्री महाकाल की दिव्य भस्म आरती की गई।
आज श्री महाकालेश्वर मंदिर में सुबह से ही उत्साह और आनंद का माहौल बना हुआ है, भक्तों ने बाबा के बेहद करीब रहने वाले नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके दर्शन में अपने मन की बात कह कर भोलेनाथ तक पहुंचने की विनती की।

सभी भक्त बाबा के जयकारे भी लग रहे थे। “जय जय श्री महाकाल”, “जय जय शिव शंकर”, “हर हर महादेव”, “हर हर शंभु”, “ॐ नमः शिवाय” के उद्घोष से मंदिर के दर्शन। यह विशेष भस्म आरती भक्तों को एक दिव्य अनुभव कराती है, जो श्री महाकालेश्वर की दिव्यता और शक्ति का अहसास कराती है ।



