कृषि विश्वविद्यालय पेपर लीक कांड में बड़ा खुलासा, प्रोफेसर ने लिफाफे में छेद कर बनाया वीडियो; 11 हजार में छात्रों को बेचा प्रश्नपत्र

रायपुर ( शिखर दर्शन ) // इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच के दौरान पेपर लीक करने वाले नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस ने भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग के प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र की तस्वीर और वीडियो तैयार कर उसे छात्रों तक पहुंचाया था। मामले में दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं।
परीक्षा शुरू होने से करीब दो घंटे पहले सामने आया था लीक
20 अगस्त को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक प्रदेश के कृषि महाविद्यालयों में बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष, द्वितीय सेमेस्टर के AGCH-221 यानी कीटशास्त्र विषय की परीक्षा होनी थी। परीक्षा शुरू होने से करीब दो घंटे पहले सुबह 8:41 बजे कवर्धा कृषि महाविद्यालय के ई-मेल पर प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना पहुंची।
इसके कुछ ही देर बाद संबंधित अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई। छात्र और छात्र प्रतिनिधियों ने भी व्हाट्सऐप के माध्यम से प्रश्नपत्र के कुछ हिस्से वायरल होने की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को दी। जांच में प्रश्नपत्र के सोशल मीडिया के जरिए प्रसारित होने की पुष्टि हुई। इसके बाद वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं स्नातक परीक्षा प्रकोष्ठ के प्रभारी डॉ. एनआर रंगारे की शिकायत पर तेलीबांधा थाने में मामला दर्ज किया गया।
36 घंटे की जांच में सामने आया पूरा नेटवर्क
मामले की जांच के दौरान पुलिस को दुर्ग निवासी अनुज मिंज के बारे में जानकारी मिली। पुलिस टीम ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसके बाद जांच का दायरा कबीरधाम, रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और आसपास के जिलों तक बढ़ाया गया।
पुलिस के अनुसार करीब 36 घंटे की लगातार जांच के बाद प्रश्नपत्र लीक होने के स्रोत और इसमें शामिल आरोपियों की पहचान कर ली गई।
घर ले गया था परीक्षा का प्रश्नपत्र
पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी योगेश सोनकेसरिया वर्ष 2019 से भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है। पिछले करीब एक वर्ष से वह अपने कॉलेज की उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने के साथ आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र प्राप्त कर उन्हें कॉलेज ले जाने का काम करता था।
17 अगस्त को वह उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने के लिए जोरा स्थित कृषि महाविद्यालय पहुंचा था। वहां से उसने आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र प्राप्त किए। पुलिस के मुताबिक, 20 अगस्त को होने वाली AGCH-221 परीक्षा का प्रश्नपत्र वह अपने घर ले गया।
सुई से लिफाफे में किया छेद, मोबाइल से बनाया वीडियो
पुलिस का दावा है कि घर पहुंचने के बाद योगेश ने प्रश्नपत्र वाले लिफाफे के साथ छेड़छाड़ की। उसने सुई और अन्य नुकीले उपकरण से लिफाफे में छोटा छेद किया और उसमें मोबाइल कैमरा डालकर प्रश्नपत्र की वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली।
इसके बाद प्रश्नपत्र में मौजूद सामग्री की नकल तैयार की गई और उसे आगे छात्रों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
11 हजार रुपये में छात्रों तक पहुंचा प्रश्नपत्र
जांच के मुताबिक योगेश सोनकेसरिया ने प्रश्नपत्र की सामग्री अपने कॉलेज के छात्र अजय नायक और दो अन्य छात्रों को कुल 11 हजार रुपये में उपलब्ध कराई। इसके बाद अजय नायक के जरिए प्रश्नपत्र त्रिदेव पटेल, नितिन पाण्डेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू तक पहुंचा।
इसी नेटवर्क के माध्यम से परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र की सामग्री सोशल मीडिया पर प्रसारित हो गई और विश्वविद्यालय प्रशासन को इसकी जानकारी मिली।
छह आरोपी गिरफ्तार, दो की तलाश जारी
पुलिस ने मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 11 हजार रुपये नकद, छह मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग से जुड़े उपकरण, केबल तार, मोबाइल कनेक्टर, सुई, सुजा, कॉपी और फेविकोल सहित अन्य सामान बरामद किया गया है।
पुलिस के अनुसार मामले में शामिल दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं। उनकी तलाश के लिए पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
ये छह आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मुख्य आरोपी योगेश सोनकेसरिया (38), निवासी सिवनी, मध्यप्रदेश; अजय नायक (20), निवासी बलौदाबाजार; त्रिदेव पटेल (22), निवासी महासमुंद; नितिन पाण्डेय (22), निवासी बस्तर; अनुज मिंज (22), निवासी जशपुर और आदित्य साहू (20), निवासी बालोद को गिरफ्तार किया है।
लगभग 1200 विद्यार्थियों से जुड़ा था मामला
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी परीक्षा 20 अगस्त को आयोजित की जानी थी। इस परीक्षा में प्रदेश के कृषि महाविद्यालयों के करीब 1200 विद्यार्थी शामिल होने वाले थे। प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर पहुंचने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इसे निरस्त कर दिया।
अब यह परीक्षा सितंबर के पहले सप्ताह में दोबारा आयोजित की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने दिए थे सख्त कार्रवाई के निर्देश
मामले को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी गंभीरता से लिया था। उन्होंने अधिकारियों को पेपर लीक प्रकरण में कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने कहा था कि परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की बात भी मुख्यमंत्री ने कही थी।



