गौधाम में गोवंश की मौत पर उठे सवाल, गौसेवकों ने कहा- क्षमता से ज्यादा पशु भरने से बिगड़े हालात; योजना की जांच की मांग

बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // मस्तूरी क्षेत्र के जैतपुरी स्थित सरकारी गौधाम में गोवंश की लगातार मौत का मामला सामने आने के बाद गौसेवकों ने पशुपालन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि गौधाम में क्षमता से अधिक गोवंश को रखा जा रहा है, लेकिन उनके लिए पर्याप्त चारा, उपचार, पानी और रहने की व्यवस्था नहीं है। गौसेवकों का दावा है कि यहां रोजाना 6 से 7 गोवंश की मौत हो रही है।

मामले की जानकारी मिलने के बाद गौसेवकों ने गौधाम का निरीक्षण किया। यहां कीचड़ में फंसे और बेहद कमजोर हालत में मिले कुछ गोवंश को उपचार के लिए बिलासपुर स्थित गौ सेवा धाम भेजा गया है। गौसेवकों ने प्रशासन से तत्काल व्यवस्था सुधारने और मामले की जांच कराने की मांग की है।
शहर से पकड़े जा रहे गोवंश को गौधाम में भेजने पर सवाल
गौसेवकों का कहना है कि बिलासपुर शहर में नगर निगम द्वारा पकड़े जा रहे गोवंश को सरकारी गौधाम योजना के तहत जैतपुरी की गौशाला में भेजा जा रहा है। आरोप है कि पशुपालन विभाग का जोर अधिक से अधिक गोवंश को गौधाम में शिफ्ट करने पर है, लेकिन वहां कितने पशुओं को रखने की क्षमता है और उनकी देखभाल के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं या नहीं, इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
उनका आरोप है कि गौधाम में पशुओं की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है, जबकि नियमित रूप से पशु चिकित्सक और विभागीय अधिकारियों के निरीक्षण की व्यवस्था प्रभावी रूप से नहीं हो रही है।
लखासार और मोपका में भी उठ चुके हैं सवाल
गौसेवकों ने दावा किया कि जैतपुरी इस तरह की पहली घटना नहीं है। इससे पहले मुख्यमंत्री द्वारा उद्घाटित लखासार के गौधाम में भी बड़ी संख्या में गोवंश रखे जाने के बाद पशुओं की मौत का मामला सामने आया था। इसी तरह मोपका स्थित नगर निगम के गौधाम में भी अधिक संख्या में गोवंश रखे जाने के कारण मौत की शिकायतें आने का दावा गौसेवकों ने किया है।
गौसेवकों का कहना है कि लगातार ऐसी घटनाएं सामने आने के बावजूद योजना के संचालन और संबंधित व्यवस्थाओं की गंभीर जांच नहीं कराई जा रही है।
20 लाख के शेड, चरवाहे और डॉक्टर के मानदेय पर भी सवाल
गौसेवक विपुल शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकारी गौधाम योजना के तहत शेड निर्माण के लिए करीब 20 लाख रुपये, चरवाहे के लिए 10 हजार रुपये और डॉक्टर के लिए 10 हजार रुपये वेतन या मानदेय की व्यवस्था की बात कही गई है। इसके बावजूद यदि गौधाम में गोवंश भूख, बीमारी और अव्यवस्था के कारण मर रहे हैं तो योजना के क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि केवल गौधाम का निर्माण कर देना पर्याप्त नहीं है। वहां गोवंश की संख्या के अनुसार चारा, पानी, चिकित्सा सुविधा, साफ-सफाई, कर्मचारी और पर्याप्त जगह उपलब्ध होना जरूरी है। यदि इन व्यवस्थाओं की निगरानी नहीं होगी तो सरकारी योजना का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।
विपुल शर्मा बोले- जिम्मेदार अधिकारियों पर हो कार्रवाई
गौसेवक विपुल शर्मा ने कहा कि जैतपुरी की घटना को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक योजना शुरू होने के बाद यह तीसरी बड़ी घटना है, जिसमें सरकारी गौधाम की व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। उन्होंने पशुपालन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने और लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी व्यक्ति को गौपालन का पर्याप्त अनुभव नहीं है तो उसे गौधाम की जिम्मेदारी क्यों दी जाती है? और जब किसी गौधाम में पहले से मौजूद गोवंश की देखभाल के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है तो वहां लगातार नए पशुओं को क्यों भेजा जाता है?
मुख्यमंत्री और पशुपालन मंत्री से योजना में सुधार की मांग
गौसेवकों ने मुख्यमंत्री और पशुपालन मंत्री से पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाएं केवल दफ्तरों में बैठकर तैयार करने के बजाय धरातल पर काम करने वाले गौसेवकों और अनुभवी लोगों की राय लेकर लागू की जानी चाहिए।
गौसेवकों ने मांग की है कि प्रत्येक सरकारी गौधाम की क्षमता निर्धारित की जाए और उससे अधिक गोवंश को वहां नहीं रखा जाए। साथ ही नियमित पशु चिकित्सा जांच, पर्याप्त चारा-पानी, साफ-सफाई और जिम्मेदार कर्मचारियों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने यह भी मांग की कि गौधाम का संचालन ऐसे व्यक्ति को सौंपा जाए, जिसे कम से कम पांच वर्ष का व्यावहारिक गौपालन का अनुभव हो। गौसेवकों का कहना है कि योजना का उद्देश्य गौवंश का संरक्षण होना चाहिए, न कि अव्यवस्था के कारण उनकी जान जोखिम में पड़ना।



