बिलासपुर संभाग

मौत को मात देने के बाद लिया संकल्प, अब हेलमेट के बिना बाइक पर नहीं बैठते शिक्षक विनोद कुमार

एक हादसे ने बदल दी जिंदगी: शिक्षक ने हेलमेट को बनाया जीवन का नियम, अब हर सफर पर देते हैं सड़क सुरक्षा का संदेश

मुंगेली ( शिखर दर्शन ) // सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए केवल अभियान ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत अनुशासन भी बड़ा उदाहरण बन सकता है। मुंगेली जिले के जरहागांव निवासी शासकीय शिक्षक विनोद कुमार इसी सोच के साथ वर्षों से लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। उनके लिए हेलमेट केवल यातायात नियमों का पालन करने का साधन नहीं, बल्कि जीवन की सुरक्षा का सबसे भरोसेमंद साथी बन चुका है। यही वजह है कि वे दोपहिया वाहन पर निकलते समय दूरी चाहे कितनी भी कम क्यों न हो, बिना हेलमेट के कभी घर से बाहर नहीं निकलते।

एक दुर्घटना ने बदल दी सोच

करीब पांच वर्ष पहले विनोद कुमार एक गंभीर सड़क दुर्घटना का शिकार हुए थे। हादसे में उन्हें शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं और लंबे समय तक उपचार कराना पड़ा। हालांकि उस समय उन्होंने हेलमेट पहन रखा था, जिसके कारण उनके सिर को गंभीर चोट नहीं लगी। चिकित्सकों ने भी माना कि यदि हेलमेट नहीं होता तो दुर्घटना के परिणाम कहीं अधिक भयावह हो सकते थे। इसी घटना ने उनकी सोच बदल दी और उन्होंने संकल्प लिया कि जीवन में कभी भी बिना हेलमेट के बाइक नहीं चलाएंगे।

छोटी दूरी हो या लंबा सफर, हेलमेट हमेशा साथ

आज यह संकल्प उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। बाजार जाना हो, किसी परिचित से मिलना हो, किराना या सब्जी खरीदनी हो अथवा किसी आवश्यक कार्य से बाहर निकलना हो, हर बार हेलमेट सबसे पहले उनके सिर पर होता है। यहां तक कि सुबह योग या व्यायाम के लिए बाइक से निकलते समय भी वे हेलमेट पहनना नहीं भूलते। उनके लिए 50 मीटर और 50 किलोमीटर की दूरी में कोई अंतर नहीं है।

विद्यार्थियों और समाज को भी कर रहे जागरूक

पेशे से शिक्षक होने के कारण विनोद कुमार अपने विद्यार्थियों, अभिभावकों और आसपास के लोगों को भी सड़क सुरक्षा के प्रति लगातार जागरूक करते हैं। उनका कहना है कि हेलमेट पुलिस के चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि अपने जीवन और परिवार की खुशियों की रक्षा के लिए पहनना चाहिए। दुर्घटना कभी भी और कहीं भी हो सकती है, ऐसे में हेलमेट सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच साबित होता है।

व्यवहार से दे रहे जिम्मेदारी का संदेश

विनोद कुमार का मानना है कि अधिकांश लोग छोटी दूरी का बहाना बनाकर हेलमेट नहीं पहनते, जबकि सड़क हादसे दूरी देखकर नहीं होते। उनका आग्रह है कि प्रत्येक दोपहिया चालक को हेलमेट पहनने की आदत विकसित करनी चाहिए, ताकि अनहोनी की स्थिति में जान बचाई जा सके।

समाज के लिए बने प्रेरणा

स्थानीय लोगों का कहना है कि विनोद कुमार ने अपने व्यक्तिगत अनुभव को समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश में बदल दिया है। वे केवल स्वयं यातायात नियमों का पालन नहीं करते, बल्कि दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं। ऐसे जागरूक नागरिक सड़क सुरक्षा अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

विनोद कुमार की कहानी यह संदेश देती है कि हेलमेट केवल सिर की सुरक्षा नहीं करता, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीदों, खुशियों और भविष्य की भी रक्षा करता है।

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