09 जुलाई भस्म आरती: रजत मुकुट और पुष्पमालाओं से सजा बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप, श्रद्धालुओं ने किए अलौकिक दर्शन

उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि पर गुरुवार तड़के भगवान महाकाल की परंपरागत भस्म आरती विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुई। भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की मालाओं, सुगंधित पुष्पों और दिव्य आभूषणों से मनोहारी श्रृंगार किया गया। अलौकिक स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु तड़के से ही मंदिर पहुंचे।
मंदिर के कपाट प्रातः 4 बजे खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक तथा दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। अभिषेक के बाद भांग, चंदन एवं विभिन्न आभूषणों से भगवान का दिव्य श्रृंगार किया गया।
भस्म अर्पण से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के उपरांत ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान को रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की मालाएं तथा विविध पुष्पमालाएं अर्पित कर आकर्षक अलंकरण किया गया।
धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के पश्चात भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। भस्म आरती में शामिल श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया तथा नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं निवेदित कीं। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के गगनभेदी जयघोष से गुंजायमान रहा।



