गवाह पलट गए, फिर भी नहीं बच पाया आरोपी, नाक काटने वाले को कोर्ट ने सुनाई 3 साल की सजा

ग्वालियर कोर्ट की सख्त टिप्पणी- ‘गवाह झूठ बोल सकते हैं, मेडिकल रिपोर्ट नहीं’
ग्वालियर ( शिखर दर्शन ) // मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिला न्यायालय ने एक अहम फैसले में यह साफ कर दिया कि मजबूत वैज्ञानिक सबूतों के सामने गवाहों के पलटने से अपराध खत्म नहीं हो जाता। अपहरण कर युवक की नाक काटने के मामले में कोर्ट ने आरोपी को तीन साल की सजा सुनाई है, जबकि सुनवाई के दौरान पीड़ित और गवाह अपने बयान से मुकर गए थे।
मकान विवाद में हुआ था अपहरण
मामला 16 अगस्त 2018 का है। बहोड़ापुर इलाके में मकान खाली कराने को लेकर हुए विवाद के बाद आरोपी अजय परमार और उसके साथियों पर युवक भोलू उर्फ विशाल का अपहरण करने का आरोप लगा था। आरोपियों ने युवक के साथ मारपीट की और धारदार हथियार से उसकी नाक काट दी थी। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी।
ट्रायल के दौरान पलट गए गवाह
मामले की सुनवाई के दौरान बड़ा मोड़ तब आया जब पीड़ित विशाल और उसका भाई अदालत में अपने पुराने बयान से मुकर गए। दोनों ने आरोपियों को पहचानने से इनकार कर दिया। बचाव पक्ष ने इसे आपसी समझौता बताते हुए आरोपी को बरी करने की मांग की।
मेडिकल रिपोर्ट बनी सबसे बड़ा सबूत
कोर्ट ने हालांकि गवाहों के बदले बयानों को अंतिम सत्य मानने से इनकार कर दिया। अदालत ने घटना के तुरंत बाद दर्ज हुई देहाती नालसी, मेडिकल दस्तावेज और सीटी स्कैन रिपोर्ट को अहम सबूत माना। जांच में ‘नेजल बोन फ्रैक्चर’ की पुष्टि हुई थी, जिसने हमले की गंभीरता साबित कर दी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान अदालत ने खुज्जी बनाम मध्य प्रदेश राज्य मामला का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि वैज्ञानिक और चिकित्सीय प्रमाण मजबूत हों, तो बाद में बदले गए बयान आरोपी को बचाने का आधार नहीं बन सकते।
अदालत ने दिया कड़ा संदेश
फैसले में अदालत ने टिप्पणी की कि गवाह डर, दबाव या समझौते के कारण बयान बदल सकते हैं, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्य झूठ नहीं बोलते। कोर्ट के इस फैसले को उन मामलों में



