रायपुर संभाग

तेंदूपत्ता तोड़ने वाले मजदूर का बेटा बना IFS अफसर, संघर्षों से निकलकर देशभर में हासिल की 91वीं रैंक

रायगढ़ के छोटे से गांव से निकले अजय गुप्ता ने मेहनत और हौसले के दम पर लिखी सफलता की नई कहानी

रायपुर ( शिखर दर्शन ) // कभी परिवार के साथ जंगलों में तेंदूपत्ता तोड़ने वाला एक साधारण लड़का आज भारतीय वन सेवा (IFS) का अफसर बन गया है। रायगढ़ जिले के संबलपुरी गांव निवासी अजय गुप्ता ने कठिन परिस्थितियों और आर्थिक अभावों को पीछे छोड़ते हुए देशभर में 91वीं रैंक हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता अब गांव और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

कच्चे घर में बीता बचपन

अजय का बचपन बेहद संघर्षों में गुजरा। परिवार खेती और जंगल से मिलने वाले संसाधनों के सहारे जीवन यापन करता था। गर्मी के दिनों में पूरा परिवार तेंदूपत्ता तोड़ने और महुआ बीनने जंगल जाता था। अजय भी छोटी उम्र से ही परिवार के साथ मेहनत में हाथ बंटाते थे। घर की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि बड़े सपने देखने की हिम्मत तक नहीं होती थी।

माता-पिता ने नहीं टूटने दिया पढ़ाई का सपना

अजय के माता-पिता पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन शिक्षा का महत्व अच्छी तरह समझते थे। सीमित आय के बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई कभी नहीं रुकने दी। संघर्षों के बीच भी परिवार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी और यही सोच आगे चलकर अजय की सबसे बड़ी ताकत बनी।

10वीं के नंबर बने जिंदगी का टर्निंग पॉइंट

साल 2011 में अजय ने 10वीं बोर्ड परीक्षा में 93 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के बच्चों के लिए संचालित छात्रवृत्ति योजना का लाभ मिला। यही मदद उनकी आगे की पढ़ाई का सहारा बनी। बाद में उन्हें राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर में प्रवेश मिला। एनआईटी पहुंचने के बाद उनकी सोच और सपने दोनों बड़े होने लगे।

नौकरी मिली, लेकिन मन में था बड़ा लक्ष्य

इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद अजय को नौकरी मिली। उन्होंने बस्तर क्षेत्र में ग्रामीण विकास और आदिवासी समुदायों के साथ काम करने वाली संस्था ‘प्रदान’ में करीब चार साल तक काम किया। इस दौरान उन्होंने जंगल, आदिवासी जीवन और प्रकृति को बेहद करीब से समझा। यहीं से उनके भीतर समाज और पर्यावरण के लिए कुछ बड़ा करने की इच्छा और मजबूत हुई।

नौकरी छोड़ी और शुरू हुआ असली संघर्ष

साल 2021 में अजय ने नौकरी छोड़ यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। यह सफर आसान नहीं था। चार बार मेन्स परीक्षा और तीन बार इंटरव्यू तक पहुंचने के बावजूद सफलता हाथ नहीं लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार प्रयास करते रहे और आखिरकार मेहनत रंग लाई।

पहले IRS फिर चुनी IFS

वर्ष 2025 में अजय ने सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 452वीं रैंक हासिल कर भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के लिए चयन पाया। इसके बाद भारतीय वन सेवा परीक्षा का परिणाम आया, जिसमें उन्होंने देशभर में 91वीं रैंक हासिल की। उन्होंने IRS की बजाय IFS को चुना, क्योंकि जंगल उनके जीवन और संघर्ष दोनों का हिस्सा रहे हैं।

युवाओं को दिया खास संदेश

अजय का कहना है कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, मेहनत और निरंतर प्रयास इंसान की जिंदगी बदल सकते हैं। वे युवाओं को सलाह देते हैं कि किसी भी बड़े अधिकारी या सफल व्यक्ति से मार्गदर्शन लेने में कभी झिझक नहीं करनी चाहिए। उनका मानना है कि सही दिशा और लगातार मेहनत सफलता तक जरूर पहुंचाती है।

परिवार के तीनों बच्चों ने बदली किस्मत

आज अजय का भाई डॉक्टर है और बहन इंजीनियर के रूप में काम कर रही हैं। एक छोटे से गांव और मिट्टी के घर से निकलकर तीनों भाई-बहनों ने अपनी मेहनत से परिवार की जिंदगी बदल दी। अजय गुप्ता की कहानी यह साबित करती है कि गरीबी किसी की शुरुआत तय कर सकती है, मंजिल नहीं।

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