बंगाल की सत्ता किसके हाथ? आज बीजेपी विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर लगेगी मुहर

अमित शाह की मौजूदगी में होगा नेता का चयन, कई दिग्गज नेता सीएम की दौड़ में शामिल
कोलकाता ( शिखर दर्शन ) // पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज बड़ा दिन माना जा रहा है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी विधायक दल की बैठक में राज्य के नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला होने जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली इस अहम बैठक में विधायक दल का नेता चुना जाएगा, जो बंगाल का अगला मुख्यमंत्री बनेगा। अमित शाह पर्यवेक्षक के रूप में कोलकाता पहुंचकर नवनिर्वाचित विधायकों के साथ चर्चा करेंगे, वहीं ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सह-पर्यवेक्षक की भूमिका निभाएंगे।
आजादी के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनने जा रही है। ऐसे में पार्टी नए मुख्यमंत्री के साथ मंत्रिमंडल और विधानसभा अध्यक्ष के चयन को लेकर भी रणनीति तैयार कर रही है। बैठक में बीजेपी के सभी 207 विधायक शामिल होंगे और वरिष्ठ नेताओं की सहमति के बाद विधायक दल के नेता के नाम का औपचारिक ऐलान किया जाएगा। चयनित नेता 9 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कई बड़े नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। इनमें सबसे चर्चित नाम सुवेंदु अधिकारी का माना जा रहा है। भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को हराने वाले सुवेंदु अधिकारी लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चुनाव में मात दे चुके हैं। मजबूत संगठनात्मक पकड़ और जमीनी प्रभाव के चलते उन्हें सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
इसके अलावा बीजेपी नेता अग्निमित्रा पॉल का नाम भी चर्चा में है। पेशे से फैशन डिजाइनर और अपनी बेबाक शैली के लिए पहचानी जाने वाली अग्निमित्रा ने आसनसोल दक्षिण सीट से जीत दर्ज की है। यदि पार्टी महिला चेहरे पर दांव लगाती है तो उनका नाम आगे आ सकता है।
पूर्व राज्यसभा सांसद और अभिनेत्री रूपा गांगुली भी संभावित दावेदारों में शामिल हैं। महिला मोर्चा में सक्रिय भूमिका निभाने वाली रूपा गांगुली को संगठन और जनता के बीच अच्छी पहचान हासिल है। वहीं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है। बंगाल में बीजेपी को मजबूत करने में उनकी बड़ी भूमिका मानी जाती है।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं। पार्टी संगठन और आरएसएस के साथ मजबूत तालमेल के कारण उन्हें भी महत्वपूर्ण दावेदार माना जा रहा है। इसके अलावा धार्मिक छवि वाले नेता उत्पल महाराज का नाम भी चर्चा में है, जिन्होंने कालीगंज सीट से बड़ी जीत हासिल की है।
सूत्रों के मुताबिक बीजेपी नेतृत्व मंत्रिमंडल गठन में क्षेत्रीय संतुलन, संगठनात्मक अनुभव और वैचारिक प्रतिबद्धता को प्राथमिकता दे सकता है। पार्टी और आरएसएस के बीच हुई बैठकों में ऐसे नेताओं को आगे लाने पर जोर दिया गया है, जिनकी संगठन में लंबे समय से सक्रिय भूमिका रही है।



