बंगाल में खिला ‘कमल’: श्यामा प्रसाद मुखर्जी की धरती पर BJP की ऐतिहासिक जीत

75 साल बाद पहली बार सत्ता में भाजपा, रुझानों में प्रचंड बहुमत की ओर बढ़त
कोलकाता ( शिखर दर्शन ) // पश्चिम बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं, जहां भारतीय जनता पार्टी पहली बार सत्ता में पहुंचती नजर आ रही है। चुनावी रुझानों के अनुसार भाजपा 294 सीटों वाली विधानसभा में 195 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि तृणमूल कांग्रेस करीब 90 सीटों के आसपास सिमटती दिख रही है। यदि ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो राज्य में पहली बार भाजपा की सरकार बनना तय माना जा रहा है।
इस जीत को सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि वैचारिक विजय के रूप में भी देखा जा रहा है। जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्मभूमि पश्चिम बंगाल में करीब 75 साल बाद भाजपा का ‘कमल’ खिलता नजर आ रहा है। भाजपा के लिए यह जीत उस विचारधारा की वापसी मानी जा रही है, जिसकी नींव डॉ. मुखर्जी ने रखी थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान कई बार डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों का जिक्र किया था। बैरकपुर में विजय संकल्प सभा के दौरान उन्होंने कहा था कि बंगाल में बदलाव डॉ. मुखर्जी के सपनों को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम होगा। कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने के बाद अब बंगाल में भाजपा की जीत को उसी वैचारिक क्रम की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

इतिहास पर नजर डालें तो श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 1901 में कोलकाता में हुआ था। उन्होंने 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जो आगे चलकर भाजपा की वैचारिक नींव बना। इसके बावजूद दशकों तक बंगाल की राजनीति में भाजपा हाशिये पर रही। लेफ्ट के 34 वर्षों और तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्षों के शासन में पार्टी को सीमित प्रभाव ही मिल पाया।
मौजूदा चुनाव में भाजपा ने बूथ स्तर तक व्यापक रणनीति के साथ प्रचार किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी के अन्य नेताओं ने लगातार बंगाल में रैलियां और प्रवास कर संगठन को मजबूत किया। इसका असर अब चुनावी रुझानों में साफ दिखाई दे रहा है।
कोलकाता स्थित भाजपा मुख्यालय में जश्न का माहौल है, जहां कार्यकर्ता गुलाल उड़ाकर जीत का उत्सव मना रहे हैं। यह जीत भाजपा के लिए सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि लंबे वैचारिक संघर्ष के पूर्ण होने का प्रतीक मानी जा रही है।
फिलहाल अंतिम परिणाम आना बाकी है, लेकिन मौजूदा रुझान संकेत दे रहे हैं कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है, जहां पहली बार ‘कमल’ सत्ता के केंद्र में होगा।



